भारत सरकार ने निजी क्षेत्र के बैंकों पर सरकार संबंधी बैंक लेनदेन (टैक्स व अन्य राजस्व भुगतान सुविधा, पेंशन भुगतान और लघु बचत) पर लगाया गया आधिकारिक प्रतिबंध हटा दिया है। यह जानकारी वित्त सेवाओं के विभाग ने बुधवार को दी। पूर्व में इन सेवाओं के लिए कुछ गिने-चुने निजी क्षेत्र के बैंकों को ही अनुमति थी।
इस संबंध में वित्त सेवाओं के विभाग की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि यह कदम ग्राहक सुविधाओं को और बेहतर करने के लिए व प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए लिया गया है। बयान में कहा गया कि निजी क्षेत्र के बैंक अब भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास और सरकार की सामाजिक क्षेत्र की पहलों में बराबर के भागीदार होंगे।
बयान में कहा गया है कि इस प्रतिबंध को समाप्त कर दिए जाने के बाद से अब सरकारी कार्यों के लिए निजी क्षेत्र के बैंकों के प्रमाणीकरण के लिए आरबीआई पर कोई रोक नहीं होगी। इसमें सरकार का एजेंसी व्यापार भी शामिल है। बयान में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने आरबीआई को इस फैसले से अवगत करा दिया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ट्वीट किया, ‘निजी बैंकों को सरकार से जुड़े कामकाज और योजनाओं को क्रियान्वित करने पर लगी रोक हटा ली गई है। अब सभी बैंक इसमें शामिल हो सकते हैं। निजी बैंक भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास, सरकार के कदमों और ग्राहकों की सुविधा बेहतर बनाने में समान रूप से भागीदार हो सकते हैं।’
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार पहले ही वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में आईडीबीआई के अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों के निजीकरण की घोषणा कर चुकी है। सरकार ने पिछले सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों का एकीकरण किया। इससे सरकारी बैंकों की संख्या घटकर 12 पर आ गई है जो मार्च 2017 में 27 थी।