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ओला-उबर की मनमानी पर लगेगी लगाम: सरकार ने किया तलब, किराया-बुकिंग रद्द करने संबंधी मुद्दों पर होगी बात

Mon, 09 May 2022 11:16 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

 उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने बताया कि हमने कैब एग्रीगेटर्स की बैठक बुलाई है, जिसमें हम कैब एग्रीगेटर्स से किराये की नीतियों, ज्यादा किराया, यात्रा रद्द करने और ग्राहकों के डेटा की सुरक्षा के मामले में और एक ही जगह के लिए दो लोगों से अलग-अलग किराया लेने आदि को लेकर चर्चा करेंगें।
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ओला-उबर
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विस्तार
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देश के लगभग हर राज्य में ओला और उबर अपनी सेवाएं दे रही है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में एप आधारित टैक्सी सेवा प्रदाता कंपनियों की सेवा लेने वाले कई ग्राहकों ने इसकी सर्विस को लेकर परेशानियों की बात कही है। जिसको लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए इन कंपनियों की  मनमानी पर लगाम लगाने का फैसला किया है। इसी क्रम में सरकार ने मंगलवार यानी 10 मई को कैब एग्रीगेटर्स जैसे ओला उबर, मेरु, रैपिडो आदि के अधिकारियों को तलब किया है। 

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मंगलवार को इन कंपनियों के अधिकारियों के साथ सरकार की मीटिंग होगी। उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने इसकी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि हमने कैब एग्रीगेटर्स की बैठक बुलाई है, जिसमें हम कैब एग्रीगेटर्स द्वारा किराये की नीतियों, ज्यादा किराया, यात्रा रद्द करने और ग्राहकों के डेटा की सुरक्षा के मामले में और एक ही जगह के लिए दो लोगों से अलग-अलग किराया लेने आदि को लेकर चर्चा करेंगें। दरअसल, जब भी ओला या उबर के चालक तय जगह पर जाने से इनकार करते हैं तो ये ग्राहक को बुकिंग रद्द करने और साथ ही उसका जुर्माना भी भरने के लिए बाध्य करते हैं। 

सभी मामलों की मांगी जानकारी
रोहित सिंह ने एक कार्यक्रम में कहा कि हमने ओला और उबर से सभी मामलों की जानकारी मांगी है। उनसे यह भी पूछा गया है कि एक ही जगह पर जाने के लिए यात्रियों से अलग-अलग किराया क्यों लिया जाता है। मंत्रालय इन कंपनियों से ग्राहकों के डेटा को सुरक्षित रखने के लिए उठाए गए कदमों की भी जानकारी मांगेगी। 
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ग्राहकों से काफी शिकायतें मिली हैं
पिछले हफ्ते कें द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) की मुख्य आयुक्त निधि खरे ने कहा था कि अबर और ओला जैसी कैब सेवा कंपनियों के बारे में ग्राहकों से काफी शिकायतें मिली हैं जिनमें प्रमुख तौर पर किराया बढ़ाने और बुकिंग को रद्द करने जैसे मामले हैं। कई मामलों में ऐसा देखा गया है ये कंपनियां नए ग्राहकों से कम किराया वसूलती हैं, जबकि पुराने ग्राहकों से ज्यादा किराया लेती हैं।

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