दिवाली से पहले या फिर उसके ठीक बाद जीएसटी दरों की स्लैब में सरकार कटौती कर सकती है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रविवार को एक कार्यक्रम में संकेत दिया है कि राजस्व बढ़ने के बाद माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत स्लैब में कटौती की जा सकती है और इसके लिए सरकार के पास काफी स्कोप है। जेटली ने कहा, ‘हमारे पास इसमें दिन के हिसाब से सुधार करने की गुंजाइश है। हमारे पर सुधार की गुंजाइश है और अनुपालन का बोझ कम किया जा सकता है खासकर छोटे टैक्सपेयर्स के मामले में।’
इसके साथ ही जेटली ने कहा है कि जिनको विकास चाहिए, उनको इसके लिए कीमत चुकानी होगी। उन्होंने कहा कि विकास के लिए पैसों की जरूरत होती है, हालांकि इसे ईमानदारी से खर्च किया जाना चाहिए। जेटली ने कहा कि किसी भी सरकार के लिए आय होना लाइफलाइन है। इसके जरिए ही देश को विकासशील से विकसित राष्ट्र में तब्दील किया जा सकता है।
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उन्होंने कहा, 'ऐसे समाज में करदाता न होने की ज्यादा चिंता नहीं की जाती, वहां अब लोग समय के साथ टैक्स के लिए आगे आ रहे हैं। इसी के चलते करों को एक कर दिया गया है। एक बार बदलाव स्थापित हो जाएंगे, फिर हमारे पास सुधार के लिए जगह होगी।'
उन्होंने कहा, ‘हमारे पास सुधार की गुंजाइश है। एक बार हम राजस्व की दृष्टि से तटस्थ बनने के बाद बड़े सुधारों के बारे में सोचेंगे। मसलन कम स्लैब। लेकिन इसके लिए हमें राजस्व की दृष्टि से तटस्थ स्थिति हासिल करनी होगी।’’ फिलहाल जीएसटी की चार स्लैब हैं जो शून्य से 28 प्रतिशत के बीच हैं।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करना शुरुआती चरण में उम्मीद से अधिक सरल रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच शीर्ष पर फैसला लेने की प्रक्रिया काफी संस्थागत रही है और रोजमर्रा के मुद्दों से निपटने के लिए बनाई गई प्रणाली अच्छी तरह से काम कर रही है।