नोटबंदी के मुद्दे पर राजन ने इस दावे को खारिज किया कि नवंबर 2016 में 500 रुपये तथा 1,000 रुपये के नोटों को अमान्य घोषित करने से पहले सरकार ने आरबीआई से परामर्श नहीं लिया था। उन्होंने हालांकि दोहराया कि 87.5 फीसदी करेंसी को रद्द करने का ‘फैसला ठीक नहीं’ था। राजन ने कहा कि मैंने कभी नहीं कहा कि नोटबंदी को लेकर मुझसे परामर्श नहीं किया गया था।
वस्तुत:, मैंने पूरी तरह स्पष्ट किया कि हमसे परामर्श लिया गया था और मुझे नहीं लगता था कि यह बढ़िया विचार था। पूर्व गवर्नर ने कहा कि नोटबंदी सुनियोजित नहीं थी और यह बिना सोच-विचार किए लिया गया फैसला था, यह बात मैंने सरकार से कही थी, जब पहली बार यह विचार व्यक्त किया गया था।
उन्होंने कहा कि कोई भी अर्थशास्त्री यही कहेगा कि अगर 87.5 फीसदी करेंसी को अमान्य घोषित करना है, तो यह बेहतर होगा कि उतनी ही राशि की करेंसी को छापकर सर्कुलेशन के लिया पहले से तैयार रखा जाए।
बिना सोच-विचार किए नोटबंदी
राजन ने कहा कि भारत ने ऐसा कुछ किए बिना नोटबंदी का फैसला ले लिया। इसका अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा, लेकिन योजना कुछ इस तरह की भी थी कि जिन्होंने अपने घरों के तहखानों में काले धन को छिपा रखा था, वे सरकार के समक्ष आकर काला धन छिपाने के लिए माफी मांगने के बाद उनपर कर अदा कर सकते थे। पूर्व गवर्नर ने कहा कि जो भी व्यक्ति भारत को जानते हैं, वे जानते होंगे कि हम कानून का तोड़ कितनी जल्दी निकाल लेते हैं।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी बात तो यह थी कि नोटबंदी के तहत जितनी मुद्रा को अमान्य घोषित किया गया था, वह फिर से बैंकिंग तंत्र में वापस लौट आया। इसका अर्थ हुआ कि जिस उद्देश्य के लिए यह किया गया था, वह उस पर खरा नहीं उतरा।
नोटबंदी का दीर्घकालिक असर
लंबे समय तक हालांकि नोटबंदी का असर देखा जा रहा है। इसके नकारात्मक आर्थिक असर में लोगों के पास करेंसी का न होना, भुगतान में समर्थ न होना तथा खासकर अनौपचारिक क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों में गिरावट आना शामिल रहा।