कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी के तीनों फॉर्मूलों पर सिफरिशें तैयार हैं। गृह मंत्री के नेतृत्व में गठित मंत्री समूह (जीओएम) को जल्द उन्हें प्रेषित किया जाएगा। सिफारिशों में तीनों फॉर्मूलों के गुण-दोष स्पष्ट किए गए हैं।
अन्य की तुलना में भावांतर दोषमुक्त और आशंका पर आधारित सवाल खड़े करता है, जबकि एमएपी और निजी क्षेत्र योजना को नहीं शामिल करने के तथ्यात्मक तर्क हैं, जो बताते हैं कि इन्हें लागू करने पर खर्च और निगरानी ज्यादा करनी होगी।
अधिकारी के मुताबिक, आयोग ने अनुमानित खर्च निकाला है, जिसके मुताबिक एक फसल में डेढ़ गुना एमएसपी के लिए 75 से सवा लाख करोड़ रुपये सरकार को वहन करना होगा। मंत्रिसमूह में केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान, केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह और केंद्रीय सड़क, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी शामिल रहेंगे।
केंद्रीय कैबिनेट लेगा अंतिम फैसला
मंत्रिसमूह के निर्णय पर अंतिम फैसला केंद्रीय कैबिनेट लेगी। माना जा रहा है कि यह समूह इस सप्ताह के अंत या अगले सप्ताह बैठक कर सकता है। गौरतलब है कि एमएसपी को डेढ़ गुना करने की घोषणा वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट 2018-19 में की थी। इसमें एमएसपी को उपज के खर्च और मेहनताने के आधार पर डेढ़ गुना किया जाएगा।