आयोग के मुताबिक इस क्षेत्र में काम कर रहे कई सामाजिक उद्यमी चाहते हैं कि उन्हें छोटे किसानों तक पहुंचने का जरिया मिले। लेकिन अब तक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी। सॉयल हेल्थ कार्ड में 3.80 करोड़ किसान अब तक जुड़ चुके हैं और 2.82 करोड़ केंद्र हैं।
इसका बाकायदा ऑनलाइन प्लेटफार्म है, जिसमें ऐसे उद्यमों को जोड़कर किसानों को बड़ी राहत मुहैया करायी जा सकती है। आयोग के एक अधिकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खास तौर पर आयोग से देशभर के सामाजिक उद्यमों को इस मुहिम के लिए आगे लाने को कहा है। ताकि छोटे किसानों को सही कीमत मिले और अनाज की मंडियों का एकाधिकार खत्म हो और वह एक समानांतर इकाई बने।
मध्यस्थों पर निर्भर हैं किसान
आयोग के सदस्य चंद ने कहा कि छोटे किसान पूरी तरह से मध्यस्थों पर निर्भर रहते हैं, जो मंडियों में आकर उसी अनाज को बेचकर फायदा कमाते हैं। हमारा इरादा किसानों और समाजिक उद्यमियों को मिलाना है जो सॉयल हेल्थ कार्ड के जरिए संभव हो सकता है।
गौरतलब है कि सरकार ने मिट्टी की उपज को जांचने और किसानों को उसके बारे में सही राय मुहैया कराने के लिए सॉयल हेल्थ कार्ड योजना शुरू की थी। इसमें तकनीक के जरिए बेहतर उपज के गुर भी बताए जाते हैं।