रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डी. सुब्बाराव
- फोटो : पीटीआई
रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डी. सुब्बाराव ने मौजूदा हालात में बैड बैंक को जरूरी बताया है। उन्होंने बुधवार को कहा कि कोविड-19 महामारी से लोगों और कंपनियों की आय पर असर पड़ा है, जिससे आने वाले दिनों में एनपीए तेजी से बढ़ेगा। इसमें ज्यादातर समाधान दिवालिया एवं ऋणशोधन अक्षमता कानून (आईबीसी) के दायरे से बाहर होंगे।
पूर्व गवर्नर ने कहा, अगर बैड बैंक बनाकर संकटग्रस्त बैंकों के सभी फंसे कर्ज और एनपीए इसमें स्थानांतरित कर दिए जाते हैं, तो इन बैंकों के बहीखाते साफ हो जाएंगे और देनदारी बैड बैंक पर आ जाएगी। 2017 के आर्थिक सर्वेक्षण में भी इसका सुझाव दिया गया था और फंसी संपत्तियों की समस्या से निपटने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र परिसंपत्ति पुनरुद्धार एजेंसी (पीएआरए) बनाने को कहा गया था।
उन्होंने कहा कि जीडीपी में 5 फीसदी कमी के कारण इस साल एनपीए तेजी से बढ़ेगा। आरबीआई की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में भी मार्च 2021 तक बैंकों का सकल एनपीए 12.5 फीसदी पहुंचने की बात है, जो मार्च 2020 में 8.5 फीसदी था।
भ्रष्टाचार से बचाएगा बैड बैंक
उन्होंने कहा कि बैड बैंक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि बिक्री मूल्य पर फैसला लेने वाले इकाई, उसे स्वीकार करने वाली इकाई से अलग होगी। इससे हितों के टकराव और भ्रष्टाचार से बचा जा सकता है। मलयेशिया का दानहार्ता बैड बैंक का सफल मॉडल है। आईबीसी मसौदे पर पहले ही काफी भार है और यह एनपीए का अतिरिक्त बोझ उठाने में असमर्थ होगा।