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मोतियों की खेती से बदली इंजीनियर की किस्मत, कमा रहा लाखों रुपये 

Mon, 25 Jun 2018 03:40 PM IST
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पेशे से इंजीनियर गुरुग्राम के जमालपुर गांव के विनोद मछली पालन में किस्मत आजमाना चाहते थे। पर्याप्त जमीन न होने पर उनका मछली पालन का सपना टूट गया। लेकिन, विनोद ने हार नहीं मानी और मत्स्य विभाग के अधिकारियों की सलाह पर मोतियों की खेती शुरू कर दी। विनोद हरियाणा में मोतियों की खेती करने वाले पहले किसान हैं। उन्होंने 20x10 फीट के गड्ढे से 1,100 सीप के साथ मोतियों की खेती शुरू की थी, अब 40x40 फीट के गड्ढे में 5,000 सीप से मोतियों का उत्पादन कर रहे हैं। इससे उन्हें सालाना 4,00,000 रुपये की कमाई हो रही है।

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हरियाणा फल, फूल व सब्जियों की खेती के लिए तो मशहूर था ही, अब यहां के मोती भी जयपुर, अहमदाबाद, सूरत और मुंबई में अपनी चमक बिखेर रहे हैं। विनोद कुमार अपनी मोतियों की मार्केटिंग भी खुद ही करते हैं। इससे उन्हें अच्छी कमाई हो जाती है। बिचौलियों का कोई रोल ही उनके धंधे में नहीं हैं। हरियाणा मत्स्य पालन विभाग विनोद की हरसंभव मदद करता है।
 

मोतियों की खेती करने वाले किसानों के लिए मिसाल बने विनोद

प्रदेश के लिए मोतियों की खेती में मिसाल बन चुके विनोद एक महीने की पर्ल कल्चर ट्रेनिंग भुवनेश्वर स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेश वाटर एक्वाकल्चर में कर चुके हैं। ट्रेनिंग के बाद गांव जमालपुर में मोतियों की खेती करने पर बीते साल लगभग 4,00,000 रुपये की उन्हें आमदनी हुई है। गुरुग्राम जिला प्रदेश में मोतियों की खेती करने वाला पहला जिला है।

मोतियों की खेती करने वाले पहले किसान विनोद कुमार का कहना है कि जब उन्हें गुरुग्राम जिले के मत्स्य पालन अधिकारी धर्मेंद्र सिंह ने मोतियों की खेती का सुझाव दिया, तो पहली बार उन्हें इस पर विश्वास नहीं हुआ। जब उन्होंने भुवनेश्वर जाकर ट्रेनिंग ली, तो उनमें मोतियों की खेती करने को लेकर आत्मविश्वास पैदा हुआ। उन्होंने इंजीनियरिंग के पेशे को छोड़कर इसी ओर अपना ध्यान लगाया और उसी का परिणाम है कि आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होने के साथ ही उन्होंने नाम भी कमाया है।
 

कई और किसान भी आए आगे

मत्स्य पालन मंत्री ओपी धनखड़ ने बताया कि विनोद को मोतियों की खेती से अच्छी कमाई होने पर अन्य किसानों ने भी इस दिशा में काम शुरू किया है। मत्स्य विभाग से मोतियों की खेती के लिए किसान 50 फीसदी सब्सिडी ले रहे हैं। जिला गुरुग्राम के ही गांव भौड़ाकलां के किसान रामअवतार ने एक एकड़ भूमि में मोतियों की खेती शुरू की है। कुरुक्षेत्र जिले में भी किसान इस वर्ष से मोतियों की खेती की ओर बढ़े हैं।
 
 
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ऐसे होती है मोतियों की खेती

मोती की खेती के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में लगभग 40,000 रुपये तक का खर्च आता है। मोती की खेती के लिए सीप जिसे पायला भी कहा जाता है, उसमें न्यूकिलियस डाला जाता है। इस सीप को जाल के बैग पर लगाते हैं और डंडे के सहारे खड़ा कर देते हैं। इसके बाद इसे तालाब में 3-4 फीट गहरे पानी में लगभग 8 से 10 महीने के लिए छोड़ा जाता है। उसके बाद सीप में मोती तैयार हो जाते हैं।
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