अधिकारियों का मानना है कि पंजाब की जमीन उपजाऊ होने की वजह से चंदन का पौधा तीन से चार साल में पूरी तरह तैयार हो जाता है। ऐसे में किसानों को चार से पांच साल में एक पौधे से ही पांच लाख रुपये तक का फायदा होगा। जानकारों की मानें, तो चंदन पंजाब का पौधा नहीं है, बल्कि यह पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश व जम्मू कश्मीर की ठंडी जगह पर होता है।
ऐसे में प्रदेश में इसकी कामयाबी को लेकर संशय जताया गया है, लेकिन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह प्रयोग सफल रहेगा। अगर होशियारपुर जैसे गर्म इलाके में सेब की खेती हो सकती है, तो चंदन की खेती भी पंजाब में आसानी से संभव है। इससे पहले, सरकार कई विदेशी पौधे लगा चुकी है, जो प्रदेश में कामयाब रहे हैं।
मुगलों के जमाने के पौधों से हराभरा होगा पंजाब
सरकार द्वारा पंजाब में पर्यावरण को बचाने की भी पूरी कोशिश की जा रही है, जिसके तहत आने वाले तीन साल में आठ करोड़ से अधिक पौधे लगाए जाने हैं। इनमें से तीन करोड़ पौधे अकेले मोहाली में लगाए जाएंगे। यहां पर लगने वाले सारे पौधे पंजाब में कई सालों से चले आ रहे होंगे। इनमें मुगलों के जमाने के काठी आम, कीकर, नीम व बेरी जैसे नाम शामिल हैं। सूबे के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का कहना है कि ये पौधे यहां के पर्यावरण के अनुकूल हैं। साथ ही इनसे किसानों को फायदा मिलेगा।