संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वे में इस बार फोकस नौकरियों की संख्या बढ़ाने और श्रम कानून में सुधार करने पर बल दिया गया है। इसके साथ ही रिटायरमेंट की उम्र और न्यूनतन वेतन की सीमा को भी बढ़ाने के लिए कहा गया है।
श्रम कानून में सुधार होने से काफी लोगों को नौकरियां मिल सकती है। राजस्थान का उदाहरण देते हुए आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने कहा कि ऐसा पूरे देश में किया जा सकता है। सर्वे में कहा गया कि लेबर, पूंजी और उत्पादकता को देखते हुए कहा जा सकता है कि श्रम कानून में सुधार से उद्योग जगत को बढ़त और रोजगार बढ़ाने में सहायक हो सकता है।
आर्थिक सर्वेक्षण में न्यूनतम आय को बढ़ाने के लिए बात कही गई है। इसका कहना है कि न्यूनतम मजदूरी या फिर आय को बढ़ाने से गरीब लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा।
सर्वे में महिलाओं को भी पुरुषों के समान वेतन देने की सिफारिश की गई है। वेतन या फिर मजदूरी बढ़ने से लोगों की खपत में बढ़ोतरी तो होगी, इसके साथ ही यह मध्यम वर्ग के लिए भी लाभकारी होगा। सर्वे में कहा गया है कि केंद्र सरकार को पूरे देश के लिए इसकी घोषणा करनी चाहिए ताकि इसका फायदा पूरे देश में लोगों को मिल सके।
सर्वे में रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने का भी प्रस्ताव दिया गया है। कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने सुझाव दिया है कि 2021-41 की अवधि में श्रम बल की हिस्सेदारी के रूझानों के हिसाब से सरकार को अतिरिक्त रोजगार के अवसर सृजित करने होंगे, ताकि श्रम बल में सलाना हो रही वृद्धि के हिसाब से रोजगार भी उपलब्ध कराए जा सके। इसलिए रिटायरमेंट की उम्र को बढ़ा दिया जाए, ताकि आने वाले दिनों में कई नीतिगत कठिनाईयों को कम किया जा सके।
मजदूरी विधेयक पर प्रस्तावित कोड में सभी क्षेत्रों में रोजगारों/श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी की उपयुक्तता का विस्तार किया जाए और इसमें संगठित तथा असंगठित दोनों क्षेत्रों को शामिल किया जाए।
यह पोर्टल कॉमन सर्विस सेंटरों (सीएससी), ग्रामीण हाटों आदि में अवश्य उपलब्ध हो, जिसमें आवश्यक जनसंचार कवरेज हो, ताकि श्रमिकों को अपने सौदेबाजी के कौशल की पूरी जानकारी रहे और उसकी निर्णय करने की शक्ति मजबूत हो।आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि एक प्रभावी न्यूनतम मजदूरी प्रणाली की स्थापना एक तात्कालिक आवश्यकता है, जिसका विकास के विविध आयामों पर लाभकारी प्रभाव पड़ेगा।