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Crypto Terror Funding: टेरर फंडिंग के लिए हो रहा क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल, आपका निवेश कितना सुरक्षित है?

Thu, 04 Aug 2022 07:45 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Crypto Terror Funding: भारत आतंकी गतिविधियों से बहुत ज्यादा प्रभावित रहा है। कश्मीर में लंबे समय से आतंकी गतिविधियों के कारण हालात समान्य नहीं हो पा रहे हैं। अब वहां आतंक को खाद पानी देने के लिए बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल होने की बातें सामने आ रही हैं।
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क्रिप्टोकरेंसी - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर पुलिस की राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) ने बुधवार को बिटकॉइन ट्रेड (Bitcoin Trade) के मामले में कई स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान जांच एजेंसी (Security Agency) को डिजिटल उपकरण, सिम कार्ड, मोबाइल फोन और कई जरूरी कागजात बरामद हुए जो टेरर फंडिग (Terror Funding) में बिटकॉइन के इस्तेमाल ओर इशारा करते करते हैं। 

जांच में यह बात सामने आई है कि आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए पैसा बिटक्वाइन के रूप में भेजा गया है। इस घटना ने एक बार फिर इस बहस को हवा दे दी है कि क्या क्रिप्टोकरेंसी के तार टेरर फंडिंग से जुड़े हैं? यह दुनिया के लिए कितना खतरनाक है? क्रिप्टोबाजार में निवेश किया गया पैसा कितना सुरक्षित है? 

क्रिप्टोबाजार के लिए खतरे की घंटी है टेरर फंडिंग 

भारत सरकार ने किसी भी तरह की क्रिप्टोकरेंसी लीगल नहीं है। इसके बाद भी लोग बड़े पैमाने पर इसमें निवेश कर रहे हैं। भारत में अलग-अलग क्रिप्टोकरेंसी में कुल निवेश वर्ष 2021 में 15 गुना बढ़कर 438.18 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है। टेरर फंडिंग में क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल की खबर आने से एक बाद तो साफ हो गई है कि क्रिप्टोकरेंसी में जो भी पैसा निवेश किया जा रहा है वह सुरक्षित तो कतई नहीं है। 

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क्रिप्टो के नियमन के लिए अधिकतर देशों में कानून नहीं

दुनिया के अधिकतर देशों में क्रिप्टो को रेग्युलेट करने के लिए कोई कानून भी नहीं है। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) 2020 के दिशानिर्देशों के अनुरुप महज कुछ देशों ने ही क्रिप्टो को रेग्यूलेट करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं ताकि डिजिटल करेंसी या एनएफटी (Non-Fungible Tokens) का इस्तेमाल मनी लॉउंड्रिंग या टेरर फंडिंग के लिए नहीं किया जा सके। 

क्रिप्टो के टेरर कनेक्शन पर एशियाई देश बरत रहे लापरवाही

कुछ ऐसे एशियाई देश भी हैं जहां आतंकवाद का इतिहास रहा है और क्रिप्टो के बढ़ते चलन ने इस खतरे को कई गुना और बढ़ा दिया है, पर वे इसके खिलाफ अब तक सतर्क नहीं हुए हैं। ऐसे देशों  की लिस्ट में पहला नाम इंडोनेशिया का है जिसने अब तक FATF के गाइडलाइन  के अनुसार क्रिप्टो को रेग्यूलेट करने के लिए  कानून नहीं बनाए हैं। फिलिपिंस भी मनी लाउंड्रिंग के खिलाफ सख्त कानून लागू नहीं कर पाने की वजह से FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल होने की कगार पर खड़ा है। 

बैंक इंडोनेशिया ने टेरर फंडिंग में क्रिप्टो के इस्तेमाल का जताया था अंदेशा 

बैंक इंडोनेशिया (Bank Indonesia) का पेमेंट सिस्टम ब्लूप्रिंट 2025 भी इस आशंका पर मुहर लगाता है कि क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) का इस्तेमाल मनी लाउंड्रिंग और आतंकी गतिविधियों में किया जा सकता है। इस ब्लूप्रिंट में कहा गया है क्रिप्टो के माध्यम से लेनदेन को सुरक्षित बनाने के लिए कानून की सख्त जरूरत है। इंडोनेशिया में अभी ऐसे साइबर कानूनों की  कमी है।
 

फिलिपिंस में भी क्रिप्टो का इस्तेमाल कर आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिया गया 

वहीं, फिलिपिंस की एंटी मनी लाउंड्रिंग काउंसिल ने आतंकवाद और आतंकवाद वित्तपोषण जोखिम मूल्यांकन 2021 (Terrorism and Terrorism Financing Risk Assessment 2021) नाम की अपनी रिपोर्ट में कहा है कि साल 2019 और 2020 के बीच देश में लगभग 1.77 मिलियन फिलिपाइन पेसो का संदिग्ध लेनदेन क्रिप्टो के माध्यम से किया गया। उसके बावजूद देश में आश्चर्यजनक रूप से क्रिप्टो को लीगल टेंडर के रूप में उपयोग करने की छूट है, क्रिप्टो में  किए गए निवेश को वहां यूनियन बैंक ऑफ फिलीपींस के एटीएम से नकद के रूप में भी निकालने की सुविधा है।

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 Bitcoin

भारत में भी क्रिप्टोकरेंसी के लिए ठोस कानून की जरूरत 

भारत में क्रिप्टो (Crypto) को रेग्युलेट करने के लिए ठोस कानून की कमी है। अब देश की सुरक्षा एजेंसियों को भी टेरर फंडिंग (Terror Funding) में क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल के सबूत मिलने लगे हैं। दुनिया में क्रिप्टो के बढ़ते प्रचलन के बीच इस बात पर मंथन किए जाने की जरूरत है कि आखिर आतंकी संगठनों के बीच क्रिप्टो के इस्तेमाल का प्रचलन क्यों बढ़ रहा है? 

आतंकी संगठन सुरक्षा एजेंसियों को झांसा देने के लिए नए-नए तौर-तरीकों की तलाश में लगे रहते हैं। क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल आतंकी ग्रुप्स में इसलिए भी बढ़ रहा है क्योंकि इसके माध्यम से किए गए लेनदेन को ट्रेस करना आसान नहीं होता। क्रिप्टो के इस्तेमाल से वे पर्दे के पीछे रख कर अपने नापाक मंसूबों को अंजाम दे पाते हैं। आतंकी संगठन नए आतंकी भर्ती करने, हथियारों का भुगतान करने जैसे कामों में क्रिप्टो का इस्तेमाल करते हैं।  
इस्लामिक स्टेट ने शुरू किया क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल का चलन 

आतंकियों के बीच टेरर फंडिंग (Terror Funding) के लिए क्रिप्टो के इस्तेमाल का पहला मामला मई 2020 में सामने आया था। तब Philippine Institute for Peace, Violence and Terrorism Research (PIPTVR) ने दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (Islamic State) की ओर से क्रिप्टोकरेंसी में लेनेदेन करने के मामले का खुलासा किया था। यह सब कुछ फिलिपिंस की सरकार के नाक के नीचे हो रहा था। इस पैसे का इस्तेमाल इस्लामिक स्टेट ने दक्षिणी फिलिपिंस के मिंडानाओ क्षेत्र में अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया था। 

आतंकियों के बिटकॉइन कनेक्शन से बढ़ी चिंता 

आतंकी संगठन अगर अपने हिसाब से क्रिप्टोबाजार (Crypto Market) को नियंत्रित करने लगे तो क्रिप्टो का यह बुलबुला कभी भी फूट सकता है, इससे क्रिप्टो में निवेश करने वाले एक बड़े वर्ग को झटका लग सकता है। वैसे भी 2022 की शुरुआत से ही दुनियाभर के क्रिप्टोकरेंसी बाजार का हाल बुरा है। वर्तमान में दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन 22,824 अमेरिकी डॉलर (1,821,550.94 रुपये)  के लेवल पर कारोबार कर रही है। पिछले एक वर्षों के दौरान में 42 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की जा चुकी है। 

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