घाटे और कर्ज से गुजर रही दूरसंचार कंपनी वोडाफोन-आइडिया लिमिटेड (VIL) ने कहा कि कंपनी ने 2021-22 की पहली तिमाही के लिए लाइसेंस शुल्क का भुगतान कर दिया है। इससे पहले खबर आई थी कि जून तिमाही के लिए कंपनी द्वारा चुकाया गया लाइसेंस शुल्क 150 करोड़ रुपये कम था।
इतना है दूरसंचार कंपनी पर बकाया
इस संदर्भ में कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि, 'कंपनी ने पहली तिमाही के लिए अपने लाइसेंस शुल्क का भुगतान किया है।' बयान में उन्होंने अधिक विवरण नहीं दिया है। मालूम हो कि 30 जून 2021 तक कंपनी पर कुल सकल ऋण (पट्टे की देनदारियों को छोड़कर और ब्याज सहित, लेकिन बकाया नहीं) 1,91,590 करोड़ रुपये था। इसमें स्पेक्ट्रम भुगतान देनदारी के 1,06,010 करोड़ और समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) देनदारी के 62,180 करोड़ रुपये शामिल हैं। ऐसे में कंपनी के लिए बकाया चुकाना और कारोबार जारी रखना बिना निवेश के बेहद मुश्किल होगा।
निवेश के लिए तरस रही वीआईएल
ब्रिटिश फर्म वोडाफोन समूह के सीईओ निक रीड ने 23 जुलाई को ही स्पष्ट कर दिया था कि अब वे भारतीय ज्वाइंट वेंचर (वोडा आइडिया) में एक भी रुपये का निवेश नहीं करेंगे। हाल ही में उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला ने कर्ज के दलदल में फंसी वोडाफोन आइडिया के गैर कार्यकारी निदेशक व गैर कार्यकारी चेयरमैन के पद से इस्तीफा दे दिया। कंपनी के निदेशक मंडल ने उनका आग्रह मंजूर करते हुए इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।
23 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की थी दूरसंचार कंपनियों की याचिका
23 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वोडाफोन आइडिया और भारती एयरटेल सहित टेलीकॉम कंपनियों द्वारा देय एजीआर संबंधित बकाया भविष्य की किसी मुकदमेबाजी का विषय नहीं हो सकता है। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने एजीआर की गणना में कथित त्रुटियों को सुधारने की मांग करने वाली दूरसंचार कंपनियों की याचिका को खारिज करते हुए यह बात कही थी।