श्रीनिवास ने कहा कि कंपनी बोर्ड में पहले से नियुक्त स्वतंत्र निदेशकों को परीक्षा से छूट रहेगी, लेकिन उन्हें खुद को सरकार के डाटाबेस में पंजीकृत कराना होगा। इस प्लेटफॉर्म पर कंपनियों को सेवा देने वाले स्वतंत्र निदेशकों की पूरी जानकारी मिल सकेगी। नई नियुक्ति के लिए इच्छुक उम्मीदवारों को एक निश्चित समय में यह परीक्षा ऑनलाइन तरीके से पास करनी होगी। इसमेें भारतीय कंपनी कानून, नैतिकता और पूंजी बाजार के मानदंडों से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। उम्मीदवारों को यह परीक्षा पास करने के लिए असीमित प्रयास की अनुमति होगी।
प्रबंधन में होती है बड़ी जिम्मेदारी
कंपनी कानून के मौजूदा नियमों के मुताबिक, देश में सूचीबद्ध किसी भी कंपनी के बोर्ड में कम से कम एक तिहाई स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति जरूरी है। इनकी प्रमुख जिम्मेदारी अपने ज्ञान और अनुभव की मदद से कंपनी के प्रबंधन की गुणवत्ता बढ़ाने और उसके कामकाज पर निगरानी रखने की होती है। स्वतंत्र निदेशक एक निरीक्षक के रूप में काम करते हुए छोटे शेयरधारकों के हितों की रक्षा करता है।
रेटिंग कंपनियों में भी होगा बदलाव
आईएलएंडएफएस डिफॉल्ट को देखते हुए बाजार नियामक सेबी क्रेडिट रेटिंग कंपनियों में भी स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति बढ़ाने और इनकी संख्या बहुमत में करने की तैयारी कर रहा है। साथ ही इन कंपनियों को अपने बोर्ड में बाजार नियामक के एक नॉमिनी को रखना पड़ सकता है। सेबी की योजना इन कंपनियों के बोर्ड की संरचना बदलने और खुलासे के मानदंड बढ़ाने की है, ताकि हितों के टकराव को दूर किया जा सके।
हम यह मिथक तोड़ना चाहते हैं कि स्वतंत्र निदेशकों के पास कोई कर्तव्य नहीं है। उनमें कॉरपोरेट सारक्षता को बढ़ावा देकर उनकी जिम्मेदारी और भूमिका से अवगत कराएंगे।
-इंजेती श्रीनिवास, कॉरपोरेट मामलों के सचिव