सुप्रीम कोर्ट ने दिवालिया कानूनी कार्यवाही का सामना कर रही दूरसंचार कंपनियों द्वारा समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) से संबंधित बकाया राशि का भुगतान नहीं करने पर गुरुवार को चिंता जताई। जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा, घोड़े की कीमत चुकाए बिना ही दूरसंचार कंपनियां सवारी कर रही हैं।
बकाया राशि का भुगतान किए बगैर कोई भी स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल नहीं कर सकता। पीठ ने कहा, हम इस बात से चिंतित हैं कि एजीआर से संबंधित बकाया तकरीबन समूची राशि कहीं दिवालिया कानूनों की कार्यवाही की भेंट न चढ़ जाए। पीठ ने कहा, स्पेक्ट्रम की बिक्री के बाद नया उपभोक्ता इस स्पेक्ट्रम से संबंधित बकाया मांग से अपना पल्ला झाड़ लेगा।
सुनवाई के दौरान एयरसेल निगरानी समिति की ओर से वरिष्ठ वकील रवि कदम ने पीठ से कहा, आठ अप्रैल, 2016 से भारती एयरटेल के साथ स्पेक्ट्रम कारोबार के आठ मामले हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि दूरसंचार विभाग ने इस बिक्री को मंजूरी दी थी और बकाया राशि की मांग भी की थी। रवि ने कहा, एयरसेल ने किसी दूसरे ऑपरेटर के साथ स्पेक्ट्रम साझा नहीं किया है।
पीठ ने सवाल किया कि क्या एयरसेल से स्पेक्ट्रम खरीदने के लिए एयरटेल ने एजीआर बकाया राशि का भुगतान किया। एयरटेल की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि कंपनी ने स्पेक्ट्रम कारोबार के संबंध में सारी प्रासंगिक देनदारियों का भुगतान किया है और उसने एजीआर बकाया के रूप मे 18,004 करोड़ रुपये का चुकाए हैं।
पीठ ने दूरसंचार विभाग से 1999 से रिलायंस कम्युनिकेशंस और एयरसेल को आवंटित स्पेक्ट्रम के बारे में विवरण मांगा है। इस मामले में सुनवाई शुक्रवार को भी जारी रहेगी।