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9 मार्च 2020 को याद रखेगा बाजार, जानिए अर्थव्यस्था पर पड़ेगा इसका क्या असर

Mon, 09 Mar 2020 08:16 PM IST
अनवर अंसारी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शेयर बाजार - फोटो : अमर उजाला
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कच्चे तेल की गिरती कीमत की वजह से भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार मच गया है। 12 साल पहले जनवरी 2008 में बाजार ने पहली बार हजार अंक से ज्यादा का गोता लगाया था। उस समय 1408.35 अंकों की गिरावट दर्ज हुई थी। माना जा रहा है कि कोरोनावायरस की वजह से भी यह गिरावट आ रही है। लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार अभी और गोता लगा सकता है।

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नौ मार्च को बाजार में आई गिरावट का असर कई बड़ी कंपनियों पर बुरी तरह से पड़ा। टाटा कंसल्टेंसी सर्विस लिमिटेड को शेयर बाजार का भरोसेमंद दांव माना जाता है। लेकिन इस गिरावट का असर इस पर भी पड़ा और इसमें लगभग सात फीसदी के आसपास बिकवाली दर्ज हुई। वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयरों में भी अप्रत्याशित रूप से 12 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई।

दुनियाभर के बाजारों में इस समय गिरावट देखी जा रही है, जिसके पीछे कोरोनावायरस की वजह से ठंडे पड़े व्यापार को बड़ी वजह माना जा रहा है। लेकिन अब कच्चे तेल की कीमतों में आ रही कमी की वजह से यह गिरावट बढ़ सकती है।
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अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संगठन का मानना है कि 2020 में कच्चे तेल की मांग में कमी आने की वजह से इसकी कीमतों में कमी आ रही है। वहीं सऊदी अरब और रूस के बीच छिड़ी कच्चे तेल की कीमतों की जंग का खामियाजा भी दुनिया भुगत रही है।

तेल की गिरती कीमतों की वजह से इसके उत्पादक देश अपने बजट में कटौती करने के लिए बाध्य होंगे। इससे कॉरपोरेट दुनिया में कर्ज बढ़ेगा और सही समय पर इसका भुगतान न कर पाने की स्थिति बनेगी, जिसका असर वैश्विक आर्थिक मंदी के रूप में सामने आ सकता है।

भारत कच्चे तेल का आयातक देश है और इस वहीं गिरती कीमतों का असर यहां की खुदरा महंगाई पर भी पड़ेगा और इसमें कमी आएगी। लेकिन कच्चे तेल की कम कीमत से होने वाला मुनाफा सीमित है। रिजर्व बैंक को भी इससे राहत मिलेगी क्योंकि उस पर नीतिगत दरें घटाने का दवाब नहीं आएगा।

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