भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (सेबी) ने सूचीबद्ध कंपनियों के लिए कॉरपोरेट गवर्नेंस मानकों का विस्तृत ब्योरा जारी कर दिया है। इन मानकों में कंपनियों की ओर से किए जाने वाले डिस्क्लोजर और निवेशकों के हितों की सुरक्षा संबंधी नियमों को काफी कड़ा कर दिया गया है।
सेबी के इन प्रस्तावित नए नियमों के तहत माइनॉरिटी और विदेशी शेयरधारकों के साथ भी कंपनियों को समानता पूर्ण व्यवहार करना होगा। सेबी के नए नियम 1 अक्तूबर से लागू होंगे।
नए नियमों में कहा गया है कि कंपनियों को सौदे के लिए शेयरधारकों की मंजूरी लेनी होगी, कंपनी में व्हिसिल ब्लोवर मैकेनिज्म स्थापित करना होगा और कंपनी के बोर्ड में कम से कम एक महिला निदेशक की नियुक्ति करनी होगी। सेबी के नए मानक नए कंपनी के नियमों के अनुरूप हैं। और इन मानकों का मकसद कंपनियों के काम काज के तौर तरीकों को बेहतर बनाना है।
सेबी ने लिस्टिंग एग्रीमेंट के क्लाज 35 बी ओर 49 को संशोधित किया है। संशोधित 35 बी तहत सूचीबद्ध कंपनियों को अब आम बैठक में पास किए जाने वाले सभी प्रस्तावों पर शेयरधारकों को ई-वोटिंग की सुविधा मुहैया करानी होगी।
बाजार नियामक ने फैसला किया है कि स्वतंत्र निदेशक अधिकतम 7 सूचीबद्ध कंपनियों में बतौर स्वतंत्र निदेशक सेवा दे सकता है। वहीं पूर्णकालिक निदेशक सिर्फ तीन कंपनियों में सेवा दे सकेगा। सेबी ने नए मानकों को फरवरी में हुई बैठक में मंजूरी दी थी।