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Moody's के बाद आज S&P जारी करेगा भारत की रेटिंग, 10 साल बाद हो सकता है बड़ा सुधार

Fri, 24 Nov 2017 11:07 AM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज द्वारा एक हफ्ते पहले भारत की रेटिंग में सुधार करने के बाद शुक्रवार को एक और रेटिंग एजेंसी अपनी रेटिंग को जारी करेगा। अगर रेटिंग में सुधार होता है तो दो हफ्तों में यह दूसरा मौका होगा। 
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10 साल बाद बढ़ सकती है रेटिंग
अमेरिका रेटिंग एजेंसी स्टैण्डर्ड एंड पुअर्स (एस एंड पी) 10 साल बाद भारत की रेटिंग को बढ़ा सकता है। इससे पहले 20007 में एस एंड पी ने रेटिंग को घटा दिया था। तब एजेंसी ने BBB- रेटिंग दी थी, जो कि सबसे निम्न स्तर है। फरवरी 2005 में यह रेटिंग BB+ थी, जिसको घटा दिया गया था। अगर आज रेटिंग बढ़ती है तो नरेंद्र मोदी सरकार के लिए डबल गुड न्यूज होगी। 

पढ़ें- अटल के बाद मोदी सरकार का इकोनॉमी में जलवा, 13 साल बाद मूडीज ने बढ़ाई रेटिंग

मूडीज ने किया था यह परिवर्तन
मूडीज ने भारत की रेटिंग को 13 साल बाद एक पायदान सुधारा है और इसके भविष्य परिदृश्य को स्थिर बताते हुए ‘बीएए-2’ कर दिया है। शुक्रवार को जारी अपनी रिपोर्ट में मूडीज ने जीएसटी और नोटबंदी जैसे कदमों को अर्थव्यवस्था के मुफीद बताया है। 
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रेटिंग में इस सुधार से दुनिया भर में भारत की आर्थिक छवि बढ़ गई है जिससे इसे न सिर्फ कर्ज मिलने में आसानी होगी बल्कि कर्ज पर ब्याज भी कम देना होगा। इससे देश के आधारभूत संरचना के विकास में तेजी लाने में मदद मिलेगी जिससे रोजगार के भी अवसर खुलेंगे। 
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विश्व बैंक ने भी सुधारी थी रैंकिंग

उल्लेखनीय है कि कारोबार में सहूलियत को लेकर विश्व बैंक द्वारा जारी हालिया रिपोर्ट में भारत की स्थिति में 30 पायदान का उछाल पाया गया। इससे पहले वर्ष 2004 में संस्था ने भारत की क्रेडिट रैंकिंग में सुधार करते हुए उसे ‘बीएए-3’ किया था। यही नहीं संस्था ने 2015 में भारत की क्रेडिट रैंकिंग के आउटलुक यानी भविष्य परिदृश्य को ‘स्थिर’ से बढ़ाते हुए ‘सकारात्मक’ (पॉजिटिव) कर दिया था। बताते चलें कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ने बेहतर विकास की संभावनाओं का हवाला देते हुए भारत को यह स्थान दिया है।

ये थी बीएए-3 रेटिंग
‘बीएए-3’ निवेश श्रेणी की न्यूनतम रैंकिंग थी जो ‘जंक’ दर्जे से थोड़ा सा ऊपर है। मूडीज ने कहा कि संस्था ने रेटिंग्स अपग्रेड करने का फैसला इस उम्मीद से लिया है कि आर्थिक और सांस्थानिक सुधारों की दिशा में लगातार आगे बढ़ने से भविष्य में भारत की उच्च वृद्धि की संभावनाएं बढ़ेंगी। यही नहीं, सरकारी कर्ज के लिए भी इसका बड़ा और स्थिर वित्तीय आधार तैयार होगा। इससे मध्यम अवधि में सामान्य सरकारी कर्ज का बोझ धीरे-धीरे कम होने लगेगा।

जीएसटी से होगा सुधार
एजेंसी ने कहा है कि जीएसटी जैसे सुधार राज्यों के बीच व्यापार की बाधा को हटाते हुए उत्पादकता को बढ़ाएंगे। मौद्रिक नीति के ढांचे में सुधार, बैंकों के अटके लोन की समस्या से निपटने के लिए उठाए गए कदम और नोटबंदी जैसी कवायदें अर्थव्यवस्था की खामियों को ठीक करने की मंशा से उठाई गई हैं। इन सुधारात्मक उपायों में बायोमीट्रिक व्यवस्था के लिए आधार का विस्तार और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के जरिए सब्सिडी सही व्यक्ति तक पहुंचाने जैसे कदम भी शामिल हैं।
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