स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एस एंड पी) ने नरेंद्र मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों की तारीफ की है लेकिन भारत की रेटिंग में सुधार करने से इनकार करते हुए उसे बीबीबी माइनस पर बरकरार रखा है, जबकि भविष्य के आउटलुक को स्थिर रखा है।
एजेंसी का कहना है कि आर्थिक विकास दर में सुधार से मिली बढ़त को निम्न प्रति व्यक्ति आय और भारी-भरकम सरकारी ऋण की समस्याओं ने बराबर कर दिया है। केंद्र सरकार ने रेटिंग एजेंसी के इस दृष्टिकोण को अनुचित करार दिया है।
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अमेरिकी रेटिंग एजेंसी एस एंड पी ने शुक्रवार को कहा कि भारत को दी गई रेटिंग से उसके तेज आर्थिक विकास, सुधरी हुई मौद्रिक विश्वसनीयता और विदेश व्यापार के संतुलन की झलक मिलती है। लेकिन प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी और सरकारी ऋण में कमी के मोर्चे पर मिली नाकामयाबी ने इन सकारात्मक संकेतों के असर को खत्म कर दिया है।
इसके मद्देनजर उसकी रेटिंग में कोई सुधार नहीं किया जा रहा है। याद रहे कि 2007 में एस एंड पी ने भारत की रेटिंग बीबी प्लस से सुधार कर बीबीबी माइनस की थी। रेटिंग की भाषा में इसे सबसे खराब रेटिंग से एक पायदान ऊपर माना जता है।
एजेंसी ने कहा है कि भारत की रेटिंग में सुधार की गुंजाइश है, लेकिन इसके लिए उसे अपने सिर से कर्ज का बोझ कम करना होगा। इसके अलावा भुगतान संतुलन (निर्यात माइनस आयात) की स्थिति में सुधार होने पर भी उसकी रेटिंग बढ़ाई जा सकती है। इसके ठीक विपरीत अगर विकास दर में गिरावट, सरकार के घाटे में बढ़ोतरी और सुधार को जारी रखने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी से रेटिंग को कम भी किया जा सकता है।