घाटे में चल रही जेट एयरवेज के पास इतना भी पैसा नहीं बचा है कि वो अपने एक भी विमान को उड़ा सके। हालांकि अब जेट के चेयरमैन नरेश गोयल को पद से हटना पड़ेगा। इसी शर्त पर एयरलाइन कंपनी मे 24 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाली एतिहाद एयरवेज निवेश करेगी।
3.8 हजार करोड़ का निवेश
एतिहाद एयरवेज कुछ शर्तों के साथ जेट में 3.8 हजार करोड़ रुपये निवेश करने को तैयार हो गई है। इसके लिए उधार पर पैसा देने वाले बैंक अपने पैसे को इक्विटी में बदलेंगे। इसके बदले जेट एयरवेज के स्वामित्व वाली जेट प्रीवलेज में 51 फीसदी हिस्सेदारी को खरीदेंगे। इस प्लान के लागू हो जाने के बाद नरेश गोयल का कंपनी पर स्वामित्व पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।
मदद नहीं मिली तो बंद हो सकती है कंपनी
एतिहाद समूह के मुख्य कार्यकारी टोनी डगलस को लिखे पत्र में गोयल ने कहा कि अंतरिम तौर पर कोष जुटाने के लिए उसने जेट प्रिवलेज में अपने शेयरों को गिरवी रखने के लिए विमानन मंत्रालय से मंजूरी भी ले ली है। इस लॉयल्टी कार्यक्रम में जेट की हिस्सेदारी 49.9 फीसद है जबकि बहुलांश हिस्सेदारी एतिहाद की है।
गोयल ने आठ मार्च को लिखे पत्र में कहा, ‘अगले हफ्ते की शुरुआत में तत्काल 750 करोड़ रुपये की पूंजी निवेश से इस एयरलाइन को बचाने के लिए मैं आपके समर्थन की उम्मीद करता हूं।’ उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह अंतरिम मदद नहीं की गई तो यह एयरलाइन के भविष्य के लिए बेहतर नहीं होगा और कंपनी बंद हो जाएगी।
एतिहाद के पास जेट में अप्रैल 2014 से 24 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कंपनी अबू धाबी में सोमवार को अपने निदेशक मंडल की बैठक के दौरान जेट के समाधान पर विचार विमर्श करेगी।
इससे पहले 14 फरवरी को जेट एयरवेज के निदेशक मंडल ने कंपनी पर कर्ज का पुनर्गठन करने की योजना को हरी झंडी दे दी थी। इसके बाद कंपनी को कर्ज देने वाले बैंक सबसे बड़े हिस्सेदार बन जाएंगे क्योंकि कंपनी को दिए गए कर्ज को एक रुपये के न्यूनतम मूल्य पर शेयर में परिवर्तित कर दिया जाएगा। शेयरधारकों ने भी इस पुनर्गठन योजना को 21 फरवरी को मंजूर कर दिया।