एशियाई विकास बैंक की मदद से देश में स्थित खादी स्टोर के आधुनिकीकरण का मामला अटक गया है। कंपनियों के फीके रिस्पांस और चुनाव प्रक्रिया को देखते हुए अब स्टोर के लिए टेंडर नई सरकार के समय ही आने की संभावना है।
केंद्र सरकार का एशियाई विकास बैंक के साथ 15 करोड़ रुपये डॉलर का समझौता खादी रिफार्म के लिए किया गया है। इसी के तहत देश भर में खादी ग्रामोद्योग आयोग के स्टोर को पीपीपी मॉडल में निजी कंपनियों को सौंपना है।
खादी ग्रामोद्योग आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार खादी रिफार्म के तहत स्टोर्स के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया अब चुनाव के बाद ही हो सकेगी। इसके लिए अभी टेंडर नहीं निकाले गए हैं।
ऐसे में टेंडर आदि की जो भी प्रक्रिया अपनाई जानी है, वह अब चुनाव बाद ही होगा। हालांकि, रिफार्म पैकेज के अंतर्गत दूसरे काम किए जा रहे हैं।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार शुरू में 20 स्टोर सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत चलाने की योजना थी। लेकिन पहले चरण में निकाले गए टेंडर में कंपनियों ने ज्यादा रुचि नहीं दिखाई थी। जिसे देखते हुए अब शुरू में दो से तीन स्टोर के लिए ही टेंडर निकाले जाएंगे।
साथ ही दिल्ली और मुंबई स्थित खादी भवन को निजी हाथों में देने की प्रक्रिया से बाहर कर दिया है। इसके पहले पहले तकनीकी बोली के तहत शॉपर स्टॉप, फैब इंडिया सहित तीन कंपनियों का चयन किया गया था। पर इसके बाद की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई थी।
पीपीपी मॉडल के तहत खादी संस्थानों को नए रूप में तैयार करना है। इसके लिए एक नई कंपनी बनेगी, जिसमें 51 फीसदी हिस्सेदारी निजी कंपनी की जबकि 49 फीसदी हिस्सेदारी सरकार की होगी।