आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी इंफोसिस ने बुधवार को व्हिसिलब्लोअर के आरोपों की निंदा करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से छवि खराब करने का प्रयास था। शेयर बाजार को लिखे पत्र में कंपनी के चेयरमैन नंदन नीलेकणी ने कहा कि वे को-फाउंडर पर लगाए गए आरोपों की निंदा करते हैं। मैंने अपने सह-संस्थापकों के साथ पूरी जिंदगी कंपनी को दिया है। उन्होंने मिलकर यह संस्थान बनाया है जो आज भी निस्वार्थ भाव से काम कर रहे हैं।
भगवान भी बदल नहीं सकते इंफोसिस के नंबर
नीलेकणी ने पत्र में लिखा कि, 'अटकलों से छवि बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। को-फाउंडर अब भी इंफोसिस की लंबी अवधि की सफलता के लिए प्रतिबद्ध हैं। लेकिन अज्ञात लोगों द्वारा गलत आरोप लगाने की कोशिश हो रही थी। उचित समय पर इस पर हो रही जांच की रिपोर्ट साझा की जाएगी। भगवान भी इंफोसिस के नंबर बदल नहीं सकते हैं।'
'कंपनी ऊंचे स्तर के कॉर्पोरेट गवर्नेंस स्टैंडर्ड के लिए प्रतिबद्ध है। हम पिछले 15 सालों से व्हिसिलब्लोअर पॉलिसी को अपनाए हुए हैं। ईमानदारी और पारदर्शिता हमारे कारोबार का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। हम ऐसी शिकायतों को गंभीरता से लेते हैं। कंपनी को स्टैंडर्ड विरासत में मिली है। हम सीईओ सलिल पारेख को मजबूत ग्रोथ के संचालन का श्रेय देते हैं। इसके साथ ही नीलेकणी ने साफ किया कि वो जांच को लेकर पक्षपात नहीं कर सकते हैं।'
इंफोसिस ने व्हिसिलब्लोहर मामले को आधारहीन बताते हुए कहा है कि उसे शिकायत की जांच करते वक्त किसी भी तरह का कोई सबूत नहीं मिला है। दो नवंबर को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को लिखे पत्र में कंपनी ने कहा कि जांच के दौरान कोई भी तथ्य या फिर सबूत सामने नहीं आया, जो यह साबित करता हो कि सलिल पारेख ने नियमों का उल्लंघन करते हुए बड़ी डील की हो, और उससे कंपनी को वित्तीय तौर पर नुकसान हुआ है। ऑडिट कंपनी ने एक एक्सटर्नल लॉ फर्म को हायर किया है जो गुमनाम लोगों के शिकायतों की जांच करेगी।
पिछले महीने अमेरिकी शेयर बाजार नियामक ने भी इस मामले को लेकर के जांच शुरू की थी। व्हिसिलब्लोअर का आरोप था कि पारेख ने कंपनी की आय और लाभ बढ़ाने के लिए अनुचित तरीकों का प्रयोग किया था।
इंफोसिस चेयरमैन नंदन नीलेकणी ने कहा कि 20 सितंबर को मिली व्हिसिलब्लोअर की शिकायत को 10 अक्तूबर को ऑडिट समिति के सामने रखा गया। हालांकि एक अन्य शिकायत को भी समिति के सामने रखा गया था जिस कोई तारीख नहीं थी।