52 हजार करोड़ रुपये के कर्ज में डूबी नेशनल कैरियर एयर इंडिया के विनिवेश करने से पहले केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया है कि इसका हाल किंगफिशर एयरलाइंस जैसा नहीं होगा। जितने भी कर्मचारी एयर इंडिया में काम कर रहे हैं, उनकी नौकरी नहीं जाएगी। सरकार 2018 तक एयर इंडिया का विनिवेश पूरा कर लेगी और कोई निजी कंपनी इसका टेकओवर कर लेगी।
नागर विमानन मंत्री अशोक गजपति राजू ने लोकसभा में कहा कि कोई भी नहीं चाहता है कि उसकी नौकरी जाए। एयर इंडिया का भी हम किंगफिशर जैसा हाल नहीं करना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि एयर इंडिया आगे भी राष्ट्र और लोगों की सेवा करता रहे। इसी के साथ यह आकाश में नित नई ऊंचाई छूता रहे।
मंत्रियों का समूह देख रहा है विनिवेश
राजू ने कहा कि वित्त मंत्री अरुण जेटली के नेतृत्व में बना मंत्रियों का समूह एयर इंडिया का विनिवेश देख रहा है। इस पैनल को सांसदों सहित कोई भी व्यक्ति अपना सुझाव दे सकता है।
15 दिन में नीति आयोग ने तैयार किया ब्लूप्रिंट
नीति आयोग ने 15 दिन में सरकारी एयरलाइंस कंपनी एयर इंडिया का विनिवेश करने के लिए ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया है। अभी इस कंपनी पर 52 हजार करोड़ से ज्यादा की देनदारी है, जिसके डिसइन्वेस्टमेंट को ट्रेड यूनियन और लेफ्ट पार्टियों ने 25 सालों से रोक रखा था।
इस ब्लू प्रिंट के मुताबिक, नीति आयोग ने सरकार को सुझाया है कि वो घाटा देने वाली एयर इंडिया के रणनीतिक विनिवेश की तरफ आगे बढ़े जिसके कि बचा हुआ पैसा स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे जरूरी क्षेत्रों में खर्च किया जा सके।
नीति आयोग ने एयर इंडिया की बिक्री के संबंध में ग्राउंड वर्क तैयार कर लिया है। आयोग की रिपोर्ट उस वक्त सामने आई है जब अरुण जेटली ने हाल ही में एयर इंडिया को निजी क्षेत्र को सौंपने की वकालत की थी। जेटली ने कहा था कि जब 86 प्रतिशत विमान परिचालन निजी कंपनियां कर सकती हैं तो 100 प्रतिशत भी इसे निजी हाथों में दिया जा सकता है।
60 हजार करोड़ की ऑपरेशनल कॉस्ट
एयर इंडिया पर इस वक्त लगभग 60 हजार करोड़ का खर्चा है, जिसमें से लगभग 21 हजार करोड़ एयरक्राफ्ट से संबंधित लोन है और 8 हजार करोड़ वर्किंग कैपिटल। विनिवेश के जरिए एयरक्राफ्ट से संबंधित लोन और वर्किंग कैपिटल लोन को नए मालिक को ट्रांसफर करने का प्रस्ताव है।