फ्लिपकार्ट समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बिन्नी बंसल (37) ने मंगलवार को तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन पर निजी तौर पर गड़बड़ी करने का आरोप है। फ्लिपकार्ट की नई पैतृक कंपनी वालमार्ट के बयान के मुताबिक, बिन्नी ने कड़े शब्दों में इन आरोपों का खंडन किया है।
अमेरिकी रिटेल कंपनी ने कहा कि बिन्नी ने इस्तीफा देने का फैसला फ्लिपकार्ट और वालमार्ट की ओर से स्वतंत्र रूप से निजी तौर पर गड़बड़ी के आरोपों की जांच के बाद दिया है। हालांकि, जांच में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला जो बिन्नी के खिलाफ शिकायतकर्ता की ओर से की गई शिकायत से मेल खाता हो। शिकायतकर्ता कुछ साल पहले फ्लिपकार्ट से जुड़ा था। अब अपना उद्यम चला रहा है।
वालमार्ट के बयान के मुताबिक, जांच के दौरान बिन्नी के निर्णयों में पारदर्शिता को लेकर कई खामियां पाई गईं हैं। इसी वजह से उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया। वालमार्ट द्वारा फ्लिपकार्ट में 16 अरब डॉलर के निवेश के बाद से वह समूह के सीईओ के रूप में काम कर रहे थे।
सचिन के बाद बने रहे थे कंपनी का हिस्सा
बिन्नी अपने मित्र और फ्लिपकार्ट के सह संस्थापक सचिन बंसल के कंपनी छोड़ने के बाद भी कंपनी के साथ जुड़े रहे थे। इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक हालांकि यह पता नहीं चल पाया है कि पद से इस्तीफा देने के बाद भी क्या वो कंपनी के बोर्ड का हिस्सा बने रहेंगे। आज देर रात तक इस बारे में वालमार्ट की तरफ से आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी। फ्लिपकार्ट में बिन्नी की 6 फीसदी हिस्सेदारी है।
दो कमरे के फ्लैट से शुरू हुई थी कंपनी
बता दें कि यह पहली कंपनी है जो स्टार्टअप के रूप में शुरू हुई और एक अरब डॉलर से ज्यादा के कारोबार का लक्ष्य हासिल किया और निरंतर आगे बढ़ती जा रही है। लेकिन यह बहुतों को मालूम नहीं होगा कि इसकी शुरुआत दो बेडरूम के फ्लैट से हुई थी। आईआईटी दिल्ली से ग्रेजुएट 24 साल के सचिन बंसल और 23 साल के बिन्नी बंसल ने 2007 में बंगलूरू में इसकी स्थापना की थी।
हालांकि दोनों चंडीगढ़ के रहने वाले हैं लेकिन इससे पहले दोनों कभी मिले नहीं। आईआईटी में सचिन सीनियर थे और बिन्नी जूनियर। बंसल बंधुओं में एक समानता यह है कि दोनों साथ में अमेजन में काम कर चुके थे।चीन की टेनसेंट होल्डिंग्स लिमिटेड, टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट एलएलसी और माइक्रोसॉफ्ट की भी इसमें हिस्सेदारी है।
वालमार्ट: अमेरिका से ज्यादा विदेश में स्टोर
- इस बहुराष्ट्रीय रिटेल कंपनी का सफर 1962 में अमेरिकी राज्य अरकंसास के रोजर्स शहर में एक स्टोर से हुआ था।
- अब यह दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल कंपनी बन चुकी है जिसका सालाना राजस्व (2017 में 485.14 अरब डॉलर) नाइजीरिया जैसे देशों के जीडीपी से ज्यादा है।
- यह 14 लाख लोगों को रोजगार देती है और इसके सभी स्टोरों का कुल आकार एक अरब वर्ग फुट से ज्यादा है।
- अमेरिका में इसके लगभग पांच हजार स्टोर हैं जबकि विदेशों में छह हजार से ज्यादा।
- यह भारत के नौ राज्यों में मालिकाना हक के साथ 21 स्टोरों का संचालन करती है जो कैश एंड कैरी सिस्टम पर चलते हैं।
- इसका बंगलूरू में एक ग्लोबल रिसोर्स सेंटर और टेक्नोलॉजी सेंटर है, जिसमें 1200 इंजीनियर काम करते हैं।
- यह ग्लोबल रिसोर्स सेंटर दर्जन भर विदेशी बाजारों के लिए यहां से गैर-खाद्य पदार्थों की खरीद करता है।
ई-कॉमर्स का 200 अरब डॉलर का बाजार
सरकार समर्थित इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन के अनुसार भारतीय ई-कॉमर्स बाजार 2020 तक 64 अरब डॉलर और 2026 तक 200 अरब डॉलर हो जाएगा, जबकि 2017 में इसका आकार 38.5 अरब डॉलर का था।