मानव रहित विमान प्रणाली (ड्रोन) के नागरिक और वाणिज्यिक संचालन के लिए यथाशीघ्र सर्वोत्तम वैश्विक चलन के अनुरूप नियामकीय ढांचा बनाने की जरूरत है। यह बात नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने बुधवार को कही। उन्होंने उभरते कारोबारियों को ड्रोन सेवा प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु उन्हें प्रोत्साहन दिए जाने की बात कही और यह सुझाव दिया कि उन्हें कर से छूट दी जा सकती है।
यह सेक्टर बनेंगे लाभार्थी
कांत ने कहा कि कृषि, मात्स्यिकी, वाणिकी और सिंचाई सेक्टर ड्रोन उद्योग के प्राथमिक लाभार्थी हो सकते हैं। इन उद्योगों के लाभ के लिए स्टार्टअप कंपनियों द्वारा ड्रोन सेवा को निश्चित रूप से प्रोत्साहनों, लाभों और कर छूटों के द्वारा प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
कांत ड्रोन के लिए मेक इन इंडिया और देश में ड्रोन उद्योग को प्रोत्साहन विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। कांत ने कहा कि ड्रोन उद्योग में भारत का तेजी से आधुनिकीकरण करने और विभिन्न सेक्टरों में विकास को तेज करने की क्षमता है और ड्रोन सेवाओं के लिए एक नियामकीय ढांचा बनाने की जरूरत है। कांत ने सुझाव दिया कि सर्वोत्तम वैश्विक परिपाटियों के अनुरूप यथाशीघ्र नागरिक और वाणिज्यिक सेवाओं के लिए ड्रोन का संचालन शुरू करने के लिए नियामकीय ढांचे की जरूरत है।
सैन्य बल सबसे बड़ा उपभोक्ता
इस उद्योग में ऊर्जा भरने के लिए कुछ सुझाव देते हुए उन्होंने कहा कि सैन्य बल ड्रोन का सबसे बड़ा उपभोक्ता है और वे देश में ड्रोन उद्योग को बढ़वा देने के लिए सर्वोत्तम संभावना पेश करते हैं। उन्होंने कहा कि सैन्य बल अपनी मांगों को पूरी करने के लिए थोड़ा-थोड़ा इसका आयात करते हैं और मेरे खयाल से स्वदेशी ड्रोन उद्योग के विकास के लिए इस आयात को निश्चित रूप से बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ड्रोन के लिए मांगों को इकट्ठा करने से निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि अगले 15 साल में भारत ड्रोन के लिए करीब 50 अरब डॉलर का बाजार प्रस्तुत करता है।