वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने सदन में अडाणी समूह के बारे में बड़ी बात कही। चौधरी ने कहा कि डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (सेबी) अडाणी समूह की कुछ कंपनियों की जांच कर रही है। यह जांच सेबी के नियमन संबंधी है। एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट की तरफ से किसी तरह की जांच नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेश की होल्डिंग अडाणी ग्रुप के शेयरों में डे-टू-डे ट्रेडिंग के आधार पर है। इस बीच अडाणी समूह ने स्पष्टीकरण दिया है कि सेबी से उसे हाल में कोई पत्र नहीं मिला है। जबकि डीआरआई का नोटिस पांच साल पुराना है।
मालूम हो कि हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) द्वारा तीन फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स फंड (FPI) का डीमैट अकाउंट ब्लॉक किया गया है। इससे उनकी संपत्ति में गिरावट आई। लेकिन अडाणी समूह ने साफ कहा था कि ये खबर बकवास है और बाजार में अफवाह फैलाई गई है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि एनएसडीएल ने तीन विदेशी फंड्स Albula इन्वेस्टमेंट फंड, क्रेस्टा फंड और एपीएमएस इन्वेस्टमेंट फंड के खाते फ्रीज किए हैं। इनके पास अडाणी ग्रुप की चार कंपनियों के 43,500 करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य के शेयर हैं। अडाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड ने एनएसडीएल द्वारा तीन विदेशी फंड्स के खाते फ्रीज करने की खबर का खंडन किया और कहा कि यह स्पष्ट रूप से गलत है और निवेश करने वाले समुदाय को जानबूझकर गुमराह करने के लिए किया गया है।
उधर, अडाणी समूह ने अहमदाबाद में बयान जारी कर कहा है कि उसे हाल ही में सेबी से कोई नोटिस नहीं मिला है और जहां तक राजस्व गुप्तचर निदेशालय (DRI) के कारण बताओ नोटिस का सवाल है तो वह उसे पांच साल पहले दिया गया था। कंपनी के प्रवक्ता ने सोमवार को कहा कि समूह की कंपनियों की सेबी व कस्टम्स विभाग द्वारा जांच की खबरों पर सफाई देते हुए यह बात कही।