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Air India Disinvestment: 68 साल बाद एयर इंडिया की 'घर वापसी', टाटा संस ने जीती बोली

Fri, 08 Oct 2021 07:37 PM IST
‌डिंपल अलावाधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

टाटा संस ने सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया के लिए बोली जीत ली है। केंद्र सरकार ने कहा कि, 'टाटा संस ने सबसे अधिक बोली लगाई। दफ्तर और जमीन सरकार के पास ही रहेगी।'
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एयर इंडिया - फोटो : PTI
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विस्तार
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टाटा संस ने घाटे में चल रही सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया के लिए बोली जीत ली है। अब टाटा ग्रुप एयर इंडिया का नया मालिक होगा। एयर इंडिया के लिए टाटा संस ने 18 हजार करोड़ की बोली लगाई, जबकि स्पाइसजेट के अजय सिंह ने 15 हजार करोड़ की बोली लगाई थी। निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव तुहिन कांत पांडे ने कहा कि यह ट्रांजैक्शन दिसंबर 2021 तक पूरा हो जाएगा। टाटा के हाथ एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की कमान आएगी। Talace Pvt Ltd के जरिए टाटा ग्रुप ने एयर इंडिया के लिए बोली लगाई थी। इस कंपनी की स्थापना मुख्य रूप से इसी काम के लिए अगस्त 2020 में की गई थी।

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कंपनी पर 65 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज
बता दें कि एयर इंडिया स्पेसिफिक अल्टरनेटिव मैकेनिज्म (AISAM) पैनल ने एयर इंडिया की वित्तीय बोली पर फैसला लिया है। इस पैनल में गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत कई महत्वपूर्ण मंत्री और अधिकारी शामिल हैं। पांडे ने कहा कि एयर इंडिया पर टोटल डेट 46262 करोड़ का है। यह आंकड़ा मार्च 2021 तक का है। अगस्त के अंत तक यह आंकड़ा बढ़कर 61562 करोड़ पर पहुंच गया। सरकार को इस डील में 2,700 करोड़ रुपये का कैश मिलेगा। मौजूदा समय में एयर इंडिया 4400 घरेलू उड़ानें और विदेशों में 1800 लैंडिंग और पार्किंग स्लॉट को कंट्रोल करती है। 

दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा ने ट्वीट कर एयर इंडिया का स्वागत किया-
 

बता दें कि एयर इंडिया को बेचने की प्रक्रिया जनवरी 2020 में ही शुरू कर दी गई थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसमें लगातार देरी हुई। अप्रैल 2021 में सरकार ने एक बार फिर योग्य कंपनियों से बोली लगाने को कहा। 15 सितंबर बोली लगाने का आखिरी दिन था। साल 2020 में भी टाटा ग्रुप ने एयर इंडिया के अधिग्रहण को लेकर रुचि पत्र दिया था। दरअसल सरकार ने 2017 से ही एयर इंडिया की नीलामी के प्रयास शुरू कर दिए थे, लेकिन तब कंपनियों ने रुचि ही नहीं दिखाई थी। इसके बाद सरकार ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओएल) के नियमों में ढील दी जिसके बाद कर्ज में डूबे एयर इंडिया को खरीदने में कुछ कंपनियों ने रुचि दिखाई। नए नियमों के तहत ही कर्ज के प्रावधानों में नरमी बरती गई ताकि स्वामित्व वाली कंपनी को पूरा कर्ज न वहन करना पड़े।
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1932 में टाटा एयरलाइंस के नाम से हुई थी शुरुआत
विमानन कंपनी की 68 साल बाद 'घर वापसी' हुई है। टाटा समूह ने अक्तूबर 1932 में टाटा एयरलाइंस के नाम से एयर इंडिया की शुरुआत की थी। वर्ष 1947 में देश की आजादी के बाद एक राष्ट्रीय एयरलाइंस की जरूरत महसूस हुई। ऐसे में भारत सरकार ने एयर इंडिया में 49 फीसदी हिस्सेदारी का अधिग्रहण कर लिया। इसके बाद 1953 में भारत सरकार ने एयर कॉर्पोरेशन एक्ट पास किया और फिर टाटा समूह से इस कंपनी में बहुलांश हिस्सेदारी खरीद ली। फिर इसे एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बना दिया गया।

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ज्योतिरादित्य सिंधिया ने टाटा समूह को बधाई दी

नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने टाटा समूह को बधाई दी। उन्होंने ट्वीट किया- "एयर इंडिया की टाटा समूह में वापसी एयरलाइन के लिए एक नई सुबह का प्रतीक है! नए प्रबंधन को मेरी शुभकामनाएं, और एयरलाइन के लिए एक नया रनवे बनाने के कठिन कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए दीपम सचिव और नागरिक उड्डयन मंत्रालय को बधाई। 

 
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