राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में डीजल टैक्सी पर रोक की वजह से बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट (बीपीएम, पहले बीपीओ) कारोबार बुरी तरीके से प्रभावित हुआ है। बीपीओ
का कारोबार लगभग ठप हो गया है और जल्द ही वैकल्पिक टैक्सी का इंतजाम नहीं होने पर दिल्ली एनसीआर में कारोबार करने वाले बीपीओ किसी और शहर
में शिफ्ट हो सकते हैं। इस मामले में नैसकॉम सुप्रीम कोर्ट से भी गुहार लगाने जा रही है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के बीपीएम कारोबार को बचाने के लिए नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विस कंपनीज (नैसकॉम) ने आगे आते हुए सरकार से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से चरणबद्ध तरीके से डीजल टैक्सियों को हटाने की गुजारिश की है। नैसकॉम की दलील है कि टैक्सी सेवा कि बिना बीपीएम सेवा नहीं चल सकती है क्योंकि अधिकतर बीपीएम गुड़गांव व नोएडा में स्थित है और यहां काम करने वाले अधिकतर कर्मचारी दिल्ली में रहते हैं। टैक्सी सेवा उपलब्ध नहीं होने पर बीपीएम में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठ सकते हैं। नैसकॉम के वाइस चेयरमैन व क्वात्रो के एमडी रमन रॉय ने बताया कि दिल्ली एनसीआर में डीजल टैक्सी पर पर प्रतिबंध लगने से बीपीओ उद्योग बिल्कुल बैठ गया है।
उन्होंने बताया कि एनसीआर में बीपीएम उद्योग से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर 10 लाख लोग जुड़े हैं और कई बीपीओ दूसरे देशों की कंपनियों के लिए काम करते हैं। रॉय ने बताया कि बीपीओ उद्योग में काम करने वालों में 38 फीसदी हिस्सेदारी महिलाओं की हैं और इनकी सुरक्षा हमारे लिए हमेशा से चिंता का विषय रहा है।
उन्होंने कहा कि कानून के मुताबिक शाम आठ बजे के बाद तक काम करने वाली महिला कर्मचारियों को उनके घर तक के लिए कैब मुहैया कराना उनकी जिम्मेदारी है। इस काम में टैक्सी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नैसकॉम बीपीएम के चेयरमैन केशव मुरुगेश ने बताया कि डीजल टैक्सी पर प्रतिबंध हमारे लिए गंभीर चिंता का विषय है और बुधवार को सभी बीपीएम कंपनियों के बीच इस मामले को लेकर बैठक की गई है। इस मामले में हम तत्काल तौर पर राहत चाहते हैं और हमने सरकार से डीजल टैक्सी को चरणबद्ध तरीकेसे हटाने के साथ वैकल्पिक सुविधाओं में तेजी लाने की मांग की है।