आर्थिक तंगी से जूझ रही दूरसंचार कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड ( BSNL ) को पटरी पर लाने के लिए सरकार काम कर रही है। बीएसएनएल के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक पीके पुरवार ने कहा है कि सरकार की योजना एक महीने के भीतर सार्वजनिक कर दिए जाने की उम्मीद है। इसके लिए पुनरूत्थान पैकेज पर काम चल रहा है। पैकेज में कंपनी के कर्मचारियों के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना, संपत्तियों को बेचकर धन जुटाना और 4जी स्पेक्ट्रम का आवंटन शामिल है।
कंपनी में 1.76 लाख कर्मचारी कार्यरत
साथ ही उन्होंने कहा कि दिवाली से पहले कर्मचारियों को उनका वेतन भी मिल जाएगा। बीएसएनएल नए ग्राहक जोड़ रही है। आगे उन्होंने कहा कि कंपनी की आय 20,000 करोड़ रुपये से अधिक है। बीएसएनएल पर फिलहाल 14 हजार करोड़ की देनदारी है और वित्त वर्ष 2017-18 में उसे 31287 करोड़ का नुकसान हुआ था।
कंपनी में तीन प्रकार के सरकारी कर्मचारी हैं-
- पहले - जो सीधे नियुक्त किए गए हैं। यह कर्मचारी जूनियर स्तर के हैं और इनका वेतन कम है।
- दूसरे - जो अन्य पीएसयू कंपनियों से या विभागों से शामिल किए गए हैं।
- तीसरे - जो इंडियन टेली कम्युनिकेशंस सर्विस के अधिकारी है।
देश के लिए जरूरी है BSNL का अस्तित्व में बने रहना
इससे पहले दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि खराब वित्तीय हालत से जूझ रही सरकारी कंपनी बीएसएनएल का अस्तित्व में रहना देश के लिए बहुत जरूरी है। सरकार इस कंपनी को चलाने में आ रही परेशानियों को दूर करने के लिए प्रयास कर रही है।
वेतन पर होता है सबसे ज्यादा खर्च
प्रसाद ने कहा था कि जब भी देश के किसी भी हिस्से में कोई प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, तूफान आता है, तो बीएसएनएल ही पहली कंपनी होती है जो मुफ्त में सेवाएं देती है। कंपनी की कमाई का 75 फीसदी हिस्सा कर्मचारियों का वेतन देने में काम आता है। वहीं अन्य कंपनियां इस मद में केवल पांच से 10 फीसदी खर्च करती हैं।