भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ते एविएशन बाजारों में से एक है। ऐसा कहना है स्पाइसजेट के चेयरमैन और एमडी अजय सिंह का। आगे उन्होंने कहा कि सरकार को भारतीय विमानन क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।
अजय सिंह ने कहा है कि सरकार को एविएशन सेक्टर के लिए टैक्स की दरें घटाकर इसे रोजगार देने वाले सेक्टर के नजरिए से देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में सिविल एविएशन सेक्टर पर काफी टैक्स लगता है। यह सेक्टर के लिए सबसे बड़ी बाधा है।
हवाई ईंधन पर टैक्स है बड़ी समस्या
एविएशन सेक्टर में कम टैक्स लगाने से भारत में रोजगार बढ़ेगा। बता दें कि पूरी दुनिया में केवल भारत में हवाई ईंधन पर करीब 35 फीसदी टैक्स वसूला जाता है।
जीएसटी भी है एविएशन सेक्टर की समस्या
साथ ही सिंह ने बताया कि मेंटेनेंस और रिपेयर ऑपरेशन पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है। यह एविएशन सेक्टर की दूसरी सबसे बड़ी समस्या है।
इतना है नहीं, अधिक टैक्स की वजह से जो काम भारत में ही हो सकते हैं, वो विदेश से करवाए जाते हैं। जैसे रिपेयरिंग और इससे जुड़े काम कंपनियां विदेश में करवाती हैं। रिपेयरिंग और इससे जुड़े कामों के लिए भारत में सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग स्किल्स। एमआरओ ( मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल ) में भारत काफी अच्छा कर सकता है।
नीतिगत निर्णय लेने की जरूरत
सिंह ने कहा कि भारत को दुबई, अबू धाबी, दोहा और सिंगापुर जैसे अपने खुद के अंतरराष्ट्रीय विमानन हब बनाने की जरूरत है। इससे हवाई यातायात को रोका जा सकेगा। सिंह ने कहा कि दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू और हैदराबाद से लोग सीधे यूरोप, अमेरिका या जापान जा सकें, इसके लिए नीतिगत निर्णय लेने की भी जरूरत है।