घाटे में चल रही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का विनिवेश चालू वित्त वर्ष में पूरा नहीं हो सकेगा। निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के अधिकारी ने बृहस्पतिवार को कहा कि एयर इंडिया, बीपीसीएल और कॉनकॉर जैसी कंपनियों का रणनीतिक विनिवेश मार्च 2020 तक पूरा होने की संभावना नहीं है।
सरकार ने चालू वित्त वर्ष में विनिवेश के जरिये 1.05 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है, जबकि सितंबर में समाप्त पहली छमाही तक उसे महज 12,359 करोड़ रुपये ही मिल सके। यह लक्ष्य का करीब 15 फीसदी है। हालांकि, अकेले बीपीसीएल से सरकार को 60 हजार करोड़ मिलने का अनुमान है। इसी तरह, एससीआई से 2,000 करोड़ और कॉनकॉर से 13 हजार करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है।
महानगरों में दूरसंचार सेवा उपलब्ध कराने वाली सरकारी कंपनी एमटीएनएल ने दीपम के जरिये 23 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति बिक्री प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी के एक अधिकारी ने कहा कि अगले वित्त वित्त वर्ष तक इसे लाभ में लाने की पूरी कोशिश रहेगी। कंपनी ने मुंबई, दिल्ली और नोएडा स्थित करीब 6,200 करोड़ की जमीन और कार्यालयों की सूची पहले ही दीपम को सौंप चुका है। कंपनी के चेयरमैन और एमडी सुनील कुमार ने कहा कि ये हमारी सबसे कीमती संपत्तियां हैं। वीआरएस और विनिवेश पूरा होने के बाद हमारे मुनाफे में आने की पूरी उम्मीद है। एमटीएनएल पिछले 10 में से 9 साल घाटे में रही है।
एयर इंडिया के 13 कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक में नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि निजीकरण के बाद भी कंपनी के कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित रखने के मुद्दे पर सरकार गंभीर है। बैठक में शामिल एक कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधि ने कहा कि सरकार ने सभी संगठनों से विनिवेश प्रक्रिया को पूरा करने में सहयोग मांगा है। उसका कहना है कि मौजूदा हालात में निजीकरण के अलावा कोई विकल्प नहीं है। पिछले दिनों एयर इंडिया के एक अधिकारी ने कहा था कि अगर जून तक कंपनी को निवेशक नहीं मिला तो इसका हाल भी जेट एयरवेज की तरह होगा।