वर्तमान में महिंद्रा फाइनेंस, पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड और एचडीएफसी जैसी नामी एवं भरोसेमंद कंपनियों के कॉरपोरेट एफडी प्लान बाजार में हैं। इन बैंकों की एफडी पर एक से पांच साल तक निवेश करने पर 8 से 9 फीसदी तक का ब्याज मिल रहा है। उदाहरण के लिए एसबीआई जहां पांच साल या उससे ज्यादा की अवधि के लिए सर्वाधिक 6.65 फीसदी की दर से ब्याज दे रहा है।
इसकी तुलना यदि कॉरपोरेट एफडी से की जाए तो एफडीएफसी विभिन्न अवधि के लिए 7.95 से 8.88 फीसदी ब्याज दे रहा है। बजाज फाइनेंस 8 से 8.75 फीसदी तो पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड 8.30 से 8.45 फीसदी तक की ब्याज दे रहा है। वहीं, महिंद्रा फाइनेंस तो 15 महीने की अवधि के लिए 8.30 और 40 महीने की अवधि के लिए 9 फीसदी ब्याज दे रहा है।
ऑनलाइन निवेश पर ज्यादा ब्याज
कॉरपोरेट एफडी में किसी ब्रोकर के सहारे निवेश किया जाता है तो उस पर कम प्रतिफल मिलता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसके लिए ब्रोकर को भी कमीशन देना पड़ता है। लेकिन ग्राहक यदि सीधे या ऑनलाइन तरीके से निवेश करता है तो उसे ज्यादा ब्याज मिलता है।
बजाज कैपिटल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट विश्वजीत पराशर का कहना है कि कॉरपोरेट एफडी में निवेश करना जोखिम भरा है। ऐसे में निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि इसमें निवेश करने से पहले कंपनी की क्रेडिट रेटिंग और कारोबारी रिकॉर्ड की पूरी जानकारी हासिल कर लें। आमतौर पर निवेशकों को आकर्षित करने के लिए ऐसे एफडी पर कॉरपोरेट कंपनियां, बैंक और अन्य फाइनेंस कंपनियों से ज्यादा ब्याज देती हैं।
कंपनी एक्ट देता है अधिकार
कॉरपोरेट कंपनियों के पास कंपनी एक्ट तहत के डिपॉजिट लेने का अधिकार होता है। सामान्य तौर पर कॉरपोरेट एफडी के तहत कंपनियां जो डिपॉजिट लेती हैं, उनकी परिपक्वता अवधि छह महीने से लेकर 36 महीने तक होती है। एक्ट के तहत डिपॉजिट लेने के लिए कंपनी का नेटवर्थ न्यूनतम 100 करोड़ रुपए या 500 करोड़ रुपए तक का टर्नओवर होना आवश्यक है।