कोरोना के असर से पर्यटन कारोबार पर लगभग 1000 करोड़ का असर पड़ सकता है। इस अनुमान की तीन वजह हैं - पहली अमेरिका, इंग्लैड और चीन से लगभग 40 फीसदी सैलानी आते हैं, इन तीनों देशों में कोरोना का कहर है। दूसरी, इटली, स्पेन में छुट्टियां जून-जुलाई में होती हैं, ये भी कोरोना प्रभावित हैं। तीसरी, ताजमहल को बंद कर दिए जाने से पूरी दुनिया के सैलानियों में यह संदेश जा सकता है कि ताजनगरी में भी स्थिति ठीक नहीं है।
फिलहाल तो पर्यटन कारोबार का रोज छह करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति सामान्य होने में दिसंबर तक का समय लग सकता है। पिछले साल के मुकाबले सैलानियों की संख्या में 50 फीसदी तक कम रह सकती है। कुल 2200 करोड़ सालाना का कारोबार है। यह इस वर्ष 1200 करोड़ तक रह सकता है।
कोरोना से पहले पर्यटन पर राम मंदिर फैसला, फिर सीएए विरोध के कारण का भी असर रहा है। पिछले तीन महीनों में सैलानियों की संख्या पिछले साल के मुकाबले दो लाख कम रही है। ताज में सामान्य स्थिति में औसतन रोजाना 30 हजार सैलानी आते हैं। पिछले कुछ समय से 15 हजार रह गए थे। कोरोना के असर से संख्या गिरकर आठ हजार तक पहुंच गई थी। अब तो स्मारक बंद हैं। कारोबार हो ही नहीं रहा है।