कोविड-19 महामारी का कर्मचारियों के वेतन वृद्धि पर भी असर पड़ा है। 2020-21 में वेतन वृद्धि दशकों में सबसे कम रही। इस दौरान कंपनियों ने औसतन 3.6 फीसदी वेतन वृद्धि की है। यह 2019-20 के औसत वेतन वृद्धि 8.6 फीसदी से आधी से भी कम है।
डेलॉय टच तोहमात्सु इंडिया एलएलपी के सोमवार को जारी सर्वे के मुताबिक, वेतन वृद्धि में दो चीजों ‘समय’ और कोविड-19 के प्रभाव ने सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बड़ी संख्या में कंपनियों का कहना है कि कोरोना के कारण उनकी कमाई 20 फीसदी से ज्यादा घटी है, जिसका असर वेतन वृद्धि पर भी पड़ी है। मार्च, 2020 में लॉकडाउन से पहले जिन कंपनियों ने वेतन बढ़ाने का फैसला कर लिया था, उन्होंने अन्य संगठनों से ज्यादा वेतन वृद्धि की है। यह सर्वे 350 कंपनियों से बातचीत पर आधारित है, जो जून में शुरू किया गया।
सिर्फ 40 फीसदी कंपनियों ने बढ़ाया वेतन
सर्वे के मुताबिक, 10 में से चार यानी महज 40 फीसदी कंपनियों ने वेतन वृद्धि की है। 33 फीसदी ने वेतन नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। डेलॉय टच तोहमात्सु इंडिया एलएलपी के साझेदार आनंदोरुप घोष का कहना है कि अगर सर्वे में सिर्फ उन कंपनियों को शामिल किया जाए, जिन्होंने कर्मचारियों का वेतन बढ़ाया है तो औसत वेतनवृद्धि 7.5 फीसदी बैठती है। मौजूदा वित्त वर्ष में ऐसी कंपनियों की संख्या 10 फीसदी से भी कम है, जिन्होंने अपने कर्मचारियों को 10 फीसदी से अधिक की वेतन वृद्धि दी है।