चीन ने इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य पहल के सदस्यों की एक बैठक के दौरान कहा है कि किसी भी सदस्य की भागीदारी पर बिना किसी पूर्व शर्त के और भविष्य की चर्चा में पूर्वाग्रह के बिना सदस्यों की स्थिति स्पष्ट हो। नतीजा पारदर्शी, समावेशी और समर्थक विकास का हो। साथ ही कहा कि ई-कॉमर्स पर व्यापार संबंधी चर्चा 1998 के कार्य कार्यक्रम के तहत ही होनी चाहिए।
याद रहे कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के नेतृत्व में कई विकासशील देशों ने बार बार यह कहा है कि ई-कॉमर्स पर किसी भी परिणाम की पवित्रता और अखंडता इस बात पर निर्भर करेगी कि सदस्य ई-कॉमर्स पर 1998 के कार्य कार्यक्रम के अनुसार कैसे आगे बढ़ते हैं।
विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीए) सदस्य विकसित देशों को चीन के इस रुख से झटका लगा है। हालांकि इलेक्ट्रॉनिक चीजों पर लगाए जाने वाले उत्पाद शुल्क के मुद्दे पर वह चुप रहा है। अब देखना यह है कि अगले हफ्ते होने वाली जनरल काउंसिल बैठक की चर्चा में वह भारत और दक्षिण अफ्रीका के प्रस्ताव पर वह क्या रुख व्यक्त करता है?
गौरतलब है कि भारत डाटा सुरक्षा के मुद्दे पर लगातार कदम इसलिए उठा रहा है, क्योंकि कुछ माह पहले ही कैंब्रिज एनालिटिका नाम की कंपनी ने फेसबुक के जरिए लोगों को चुनाव के दौरान प्रभावित करने का दावा किया था। इस मामले में आईटी मंत्रालय द्वारा सख्त कार्यवाही की गई थी।