गैजेट कंपनी एपल ने अपनी इलेक्ट्रिक कारों को बाजार में उतारने की तैयारी तेज कर दी है। इसके लिए चीन की सीएटीएल और बीवाईडी कंपनियों के साथ बैटरी को लेकर बातचीत शुरू की है।
2024 तक सेल्फ ड्राइविंग ई-कार उतारने की तैयार में है कंपनी
एपल ने अब तक सार्वजनिक घोषणा नहीं की, लेकिन माना जा रहा है कि साल 2024 तक वह सेल्फ ड्राइविंग ई-कार उतार देगी। सीएटीएल विश्व की सबसे बड़ी कार बैटरी निर्माता कंपनी है। प्रमुख इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला को भी ये कई उपकरण सप्लाई करती है। दूसरी ओर बीवाईडी बैटरी उत्पादन में चौथे नंबर पर है। एपल की इस खबर से उसके शेयर 6.5 फीसदी बढ़ गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, एपल लीथियम आयरन फॉस्फेट बैटरी बनाने की तैयारी में है, जिसे सस्ता माना जाता है। इनमें निकिल व कोबाल्ट के बजाय लोहे का इस्तेमाल होता है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी घरेलू ई-वाहन उत्पादन बढ़ाने के लिए टैक्स में छूट और बैटरी उत्पादकों को अनुदान के तहत 17,400 करोड डॉलर का बजट रखा है।
रेनॉ पर डीजल वाहनों के उत्सर्जन परीक्षण में धोखाधड़ी का आरोप
फ्रांस की वाहन निर्माता कंपनी रेनॉ पर अपनी डीजल कारों के उत्सर्जन परीक्षण में धोखाधड़ी करने का आरोप लगा है। हालांकि, कंपनी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसके वाहन प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों में कोई भी हेराफेरी वाले (रिगिंग) सॉफ्टवेयर नहीं हैं। उसने हमेशा फ्रांस और पूरे यूरोप में नियमों का पालन किया है। इन आरोपों से रेनॉ की छवि पर असर पड़ता है।
दरअसल, अभियोजकों ने आरोप लगाया है कि रेनॉ ने डीजल कारों के उत्सर्जन परीक्षणों में धोखा दिया है। इससे पहले भी कई वाहन निर्माता कंपनियों पर रिगिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर ईंधन उत्सर्जन के आंकड़ों में हेरफेर करने का आरोप लग चुका है। फॉक्सवैगन और प्यूजो पर भी ऐसे आरोप लग चुके हैं। कई वर्षों के विवाद में फॉक्सवैगन को दंड, कानूनी खर्चों आदि में करीब 32 अरब यूरो (करीब 2.84 लाख करोड़ रुपये) चुकाने पड़े थे। प्यूजो को भी जांच का सामना करना पड़ा था।