आयकर विभाग सभी करदाताओं के लाभांश, पूंजीगत लाभ और बचत से मिले ब्याज की जानकारियां भी जुटाएगा। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने एक सर्कुलर में कहा है कि शेयर और म्यूचुअल फंड बेचने से मिले पूंजीगत लाभ के साथ कंपनियों के इक्विटी शेयरों के लाभांश और बचत योजनाओं के ब्याज को भी विशेष फंड ट्रांसफर (एसएफटी) में शामिल किया है।
सीबीडीटी का निर्देश- बैंक, फंड हाउस व बॉन्ड जारी करने वाली कंपनियों की जिम्मेदारी
सीबीडीटी के अनुसार, सभी करदाताओं से जुड़ी इन जानकारियों को आयकर विभाग तक पहुंचाने की जिम्मेदारी बैंकों, डाकघर, म्यूचुअल फंड हाउस, रजिस्ट्रार, बॉन्ड जारी करने वाली कंपनियों व अन्य वित्तीय संस्थानों पर होगी। इन संस्थानों को एक वित्तवर्ष में निश्चित सीमा से अधिक लेनदेन की जानकारी आयकर विभाग को देनी होगी।
ये लेनदेन आयकर की धारा 114ई के तहत एसएफटी में आते हैं। इसका मतलब हुआ कि अगर किसी निवेशक ने फंड बेचकर लाभ कमाया है, तो फंड हाउस उसके खाते की जानकारी आयकर विभाग तक पहुंचाएंगे। बैंक या डाकघर की बचत योजनाओं अथवा खाते पर मिले ब्याज की जानकारियां भी आयकर विभाग तक पहुंच जाएंगी।
रिटर्न भरने में होगी आसानी
आयकर विभाग का मानना है कि इस कदम से न सिर्फ कर चोरी पर लगाम कसी जा सकेगी, बल्कि करदाताओं को पहले से भरे रिटर्न फॉर्म मुहैया कराने में भी आसानी होगी। सरकार ने पिछले बजट में पहले से भरे रिटर्न फॉर्म देने की घोषणा की थी और वित्तीय संस्थानों से मिली लेनदेन की जानकारियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। वित्तमंत्री ने बजट-2021 में कहा था कि आयकरदाताओं को रिटर्न भरने में सहूलियत देने के लिए पहले से भरे फॉर्म मुहैया कराए जाएंगे।
अभी 16 तरह के लेनदेन पर नजर
आयकर विभाग अभी करदाताओं की ओर से किसी वित्तवर्ष में 16 तरह के बड़े लेनदेन पर नजर रखता है। विभाग इसके तहत बचत खाते में एक साल में 10 लाख से ज्यादा की नकदी जमा करने, शेयर खरीदने, एनसीडी या म्यूचुअल फंड में निवेश करने अथवा शेयर बायबैक की जानकारियां जुटाता है।
इसके अलावा किसी साल में नकद राशि से 1 लाख रुपये से ज्यादा का क्रेडिट कार्ड बिल चुकाने और पूरे वित्तवर्ष में किसी भी मोड से 10 लाख का बिल भरने की जानकारी भी आयकर विभाग जुटाता है।