नोटबंदी के बाद से अर्थव्यवस्था के कैश में 26 प्रतिशत की कमी आई है। नीति निर्माता सिस्टम में आ रही नई करेंसी पर नजर बनाए हुए हैं। नकदी निकासी की सीमा खत्म करने के बात मार्च के शुरुआत से ही साप्ताहिक नकद निकासी में कमी आई है।
डिजिटल पेमेंट्स जैसे सरकार के यूपीआई और प्राईवेट कंपनियों के एप की वजह से भी कैश की निकासी में कमी आई है।
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों की अगर बात करें तो इसके नवीनतम आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च तक सिस्टम में करीब 13.32 लाख करोड़ कैश और करेंसी थी। मौजूदा समय में कैश और करेंसी नवंबर 2016 के मुकाबले 74 प्रतिशत है यानी ये पहले की तुलना में 26 प्रतिशत तक कम है।
जिस समय प्रधानमंत्री मोदी ने 500 और 1000 के पुराने नोटों को बंद करने का ऐलान किया था तब सिस्टम में 17.97 लाख करोड़ रुपये थे। साप्ताहिक नकद निकासी भी चौथे सप्ताह में 47,400 करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 10 को समाप्त हुए सप्ताह में घटकर 22,194 करोड़ रुपये हो गई है। आपको याद होगा कि 13 मार्च को दैनिक नकद निकासी से बैन हटा लिया गया था और पूर्व प्रतिबंध की सीमा भी बहाल कर दी गई थी।
डिजिटल पेमेंट्स से भी कम नकदी के इस्तेमाल में मदद मिल पाया है। सरकार ने भी इसके लिए कई डिजिटल पेमेंट और सेटलमेंट चैनल्स शुरू किए हैं। यूनाइटेड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई जैसे प्लेटफॉर्म्स की मदद से कम रकम की निकासी में काफी मदद मिला है।
यूपीआई के तहत की जा रही निकासी की रकम भी बढ़ी है। फरवरी में जहां यूपीआई से 42 लाख निकासी हो रही था मार्च में बढ़कर ये 49 लाख हो गई। निकासी की रकम भी इस दौरान 1,900 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,970 करोड़ रुपये हो गई।