कानपुर शहर में दो दिन की हिंसा और खराब माहौल होने की आशंका के बीच बीते तीन दिनों के भीतर शहर के थोक और फुटकर बाजार को 1200 करोड़ रुपये की चपत लगी है। शहर में कपड़ा, किराना, सोना-चांदी, शक्कर, दलहन और खाद्य आइटमों का बड़ा थोक बाजार है। प्रतिदिन करीब इन ट्रेडों में 500-600 करोड़ से अधिक का कारोबार होता है।
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लेकिन हिंसा के चलते व्यापार ठप पड़ा है। शहर के अलावा बाहर के जिलों से आने वाला व्यापारी इन थोक व फुटकर बाजारों से नदारद है। गर्म कपड़ों और सहालग के बाजार को भी बड़ा झटका लगा है। जल्द अमन बहाल न होने से व्यापारियों को अब बड़े पैमाने पर माल डंप होने की चिंता है। क्रिसमस पर्व के बाजार को भी खासा नुकसान पहुंचा है।
वहीं मुस्लिम समाज में शादियों का दौर चलने से सराफा भी खुद को संकट में देख रहे हैं। जबकि यह समय इस धंधे के लिए बहुत खास माना जाता है। शहर के मुस्लिम बहुल इलाकों में दो दिन की हिंसा ने हर तरह के बाजार को आशंकित कर दिया है। व्यापारियों का कहना है कि अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो उन्हें बड़ा नुकसान होगा।
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दि किराना मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अवधेश वाजपेयी ने बताया कि हिंसा के चलते बाजारों में बिल्कुल सन्नाटा पसरा है। थोक बाजार बाहर के व्यापारियों से ज्यादा चलता है। वे इस माहौल में शहर आने से बच रहे हैं। उप्र प्रांतीय व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष अभिमन्यु गुप्ता ने बताया कि हिंसा से व्यापारी डरा हुआ है।
व्यापार-कारोबार में हर धर्म के लोग हैं। तीन दिन में हर तरह के व्यापार को खासा नुकसान उठाना पड़ा है। प्रतिनिधि उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष अनूप शुक्ला का कहना है कि हिंसा से किसी को लाभ नहीं होता है। बाहर का व्यापारी आने से बच रहा है, जिसका नुकसान सभी को उठाना पड़ रहा है।
छोटे दुकानदारों में नुकसान का अधिक भय
शहर के परेड चौराहा, बांसमंडी में सैकड़ों की संख्या में छोटे दुकानदार गर्म कपड़ों की दुकानें लगाते हैं। लेकिन हिंसा के चलते ये दुकानें नहीं लग रही हैं। इनमें ज्यादातर मुस्लिम समाज के लोगों की दुकानें हैं। इनके ग्राहक हर वर्ग के हैं। अच्छी ठंड पड़ने से इन दुकानदारों ने बड़े पैमाने पर माल मंगवाया था। अब इन्हें हिंसा के चलते माल डंप होने का भय सता रहा है।
नवंबर महीने में ठंड न पड़ने से गर्म कपड़ों का बाजार कमजोर रहा। दिसंबर की शुरुआत में अच्छी ठंड पड़ने लगी तो व्यापारियों में उम्मीद जगी। पुराना स्टाक निकलने की संभावना में नये स्टाक मंगवाए जाने लगे थे। लेकिन शहर में हिंसा से बाजार प्रभावित हुआ है। 14 जनवरी से फिर से शुभ कार्य शुरू होने हैं। ऐसे में बाजार को बड़ी उम्मीदें हैं। चरनजीत सिंह सागरी, कानपुर कपड़ा कमेटी के अध्यक्ष
मुस्लिम समाज में इस समय शादियां हो रही हैं। यह वर्ग भी बड़ा ग्राहक है। हिंसा के चलते बाहर के जिलों से आने वाले व्यापारी अभी बाजार से दूरी बनाए हैं। इससे नुकसान हो रहा है। अच्छे व्यापार के लिए शहर में शांति व्यवस्था का कायम रहना बहुत जरूरी है। राम किशोर मिश्रा, कानपुर सराफा एसोसिएशन के मंत्री
तीन दिन से बांसमंडी की आलम मार्केट और अन्य सभी दुकानें बंद हैं। यहां हिन्दू भाइयों की भी दुकानें हैं जो बंद हैं। सर्दी और सहालग का लाखों का माल भरा था, यही सीजन था जो चौपट हो गया। आगे भी बाहर से और शहर के दूसरे हिस्सों से लोग यहां खरीदारी करने नहीं आएंगे। बहुत नुकसान हो गया। मोहम्मद आलम, बांसमंडी
क्रिसमस बाजार को 30 लाख का नुकसान
कानपुर शहर के मेस्टन रोड और बिसाती बाजार क्रिसमस पर्व पर बिकने वाले आइटमों जैसे क्रिसमस ड्रेस, ट्री, सजावटी सामान, अलग-अलग स्टीकर का बड़ा बाजार है। शहर के व्यापारियों के अलावा अन्य जिलों को भी यहीं से इन सामानों की आपूर्ति होती है। लेकिन हिंसा के चलते इस बाजार पर बड़ा असर पड़ा है।
इस व्यापार में मुस्लिम समाज के लोग बड़ी संख्या में लगे हैं। व्यापारी मुश्तिकर अहमद ने बताया कि व्यापारियों का कोई धर्म या मजहब नहीं होता। वह इस काम से दशकों से जुड़े हैं। अमूमन पर्व के दो सप्ताह पहले से ही बाहरी व्यापारी आने लगते थे। और एक सप्ताह पहले इनकी संख्या देखते बनती थी लेकिन हिंसा के चलते बहुत नुकसान उठाना पड़ा है।
बाहरी व्यापारी गायब हैं और शहर का व्यापारी भी नहीं आ रहा। मोहम्मद रहमान ने बताया कि पर्व के दौरान करीब 25-30 लाख का व्यापार हो जाता है। इस बार अच्छे व्यापार की उम्मीद थी लेकिन दो दिन की हिंसा से बड़ी चपत लगी है। बाजार में बड़े पैमाने पर माल है। लेकिन अब पर्व में दो दिन ही रह गए हैं। हालात सुधरे तो माल बिकने की उम्मीद है। नहीं तो माल डंप हो जाएगा और बड़ी लागत फंस जाएगी।
ऑनलाइन व्यापार को 40 लाख की चपत
कानपुर में इंटरनेट बंद होने से मोबाइल एप आधारित सेवाओं को करीब 40 लाख का नुकसान हो चुका है। फूड और ऑनलाइन सामान डिलीवरी तथा मोबाइल रिचार्ज का काम पूरी तरह से ठप पड़ा है। शहर के सैकड़ों लोगों को रोजगार देने वाले इस बाजार में मायूसी भरा सन्नाटा है। ज्यादातर डिलीवरी ब्वॉय काम न होने से तीन दिनों से घर बैठे हैं।
कानपुर होटल, रेस्टोरेंट, गेस्ट हाउस एंड स्वीट्स एसोसिएशन के महामंत्री राजकुमार भगतानी ने बताया कि शहर में ऑनलाइन फूड डिलीवरी का बड़ा व्यापार है। शहर के छोटेे-बड़े होटलों और रेस्टारेंटों से ग्राहकों को आपूर्ति होती है। पिज्जा डिलीवरी का भी शहर बड़ा सेंटर है।
इंटरनेट न चलने से ऑर्डर नहीं मिल पा रहे हैं। और बड़ा नुकसान हो रहा है। पीरोड वनखंडेश्वर मंदिर के पास मोबाइल रिचार्ज के दुकानदार धीरज शुक्ला ने बताया कि तीन दिन में यह धंधा बेपटरी हो गया है। दुकानों पर सन्नाटा है। उधर, देसी और विदेशी कंपनियों के सामानों की डिलीवरी भी नहीं हो पा रही है। ऑनलाइन कंपनियों के डिपो में सामान डंप पड़े हैं। इससे इन कंपनियाें को भी तगड़ी चपत लगी है।