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एशिया की अर्थव्यवस्था पर कोरोना का वार, गरीबी के दायरे में आ जाएंगे करोड़ों लोग: विश्व बैंक

Tue, 31 Mar 2020 10:27 AM IST
‌डिंपल अलवधी पीटीआई, नई दिल्ली

सार

कोरोना वायरस पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है। विश्व बैंक ने अनुमान जाहिर किया है कि वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण इस साल चीन के साथ अन्य पूर्वी एशिया प्रशांत देशों में अर्थव्यवस्था की रफ्तार बहुत धीमी रहने वाली है।
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विस्तार
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विश्व बैंक ने कहा है कि अर्थव्यवस्था में सुस्ती आने से लाखों लोग गरीबी की ओर चले जाएंगे। बैंक ने सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह आंशका व्यक्त की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि क्षेत्र में इस वर्ष विकास की रफ्तार 2.1 फीसदी रह सकती है जो 2019 में 5.8 फीसदी थी। इसमें कहा गया है कि चीन की विकास दर भी पिछले साल की 6.1 फीसदी से घटकर इस साल 2.3 फीसदी रह जाएगी।

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गरीबी के दायरे में आ जाएंगे 1.1 करोड़ से अधिक लोग
बैंक का अनुमान है कि 1.1 करोड़ से अधिक संख्या में लोग गरीबी के दायरे में आ जाएंगे। यह अनुमान पहले के उस अनुमान के विपरित है जिसमें कहा गया था कि इस वर्ष विकास दर पर्याप्त रहेगी और 3.5 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठ जाएंगे।

महामारी से पूरी दुनिया में हाहाकार
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। इस जानलेवा वायरस की वजह से दुनियाभर में अब तक साढ़े सात लाख से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। अब तक 37 हजार से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। पिछले 24 घंटे में स्पेन में 913 मौतों के साथ मृतकों की संख्या 7000, इटली में 812 मौतों के साथ 11000 और फ्रांस में 418 मौतों के साथ मृतकों की संख्या 3000 के पार हो गई। 
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इसका असर कच्चे तेल पर भी पड़ा। एशियाई बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें सोमवार को 17 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई। अमेरिका में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 5.3 फीसदी गिरकर 20 डॉलर प्रति बैरल पर और अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 6.5 फीसदी गिरकर 23 डॉलर पर आ गया। दरअसल, कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए दुनिया भर में सरकारें लॉकडाउन का सहारा ले रही हैं और यात्रा प्रतिबंध लागू किए गए हैं, जिसके चलते कच्चे तेल पर भारी दबाव है। इसकी मांग में कमी आई है।

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