भारतीय महिलाएं आज घर से लेकर युद्ध के मैदान तक अपनी कामयाबी के झंडे बुलंद कर रही हैं। कई क्षेत्रों में इनका प्रदर्शन पुरुषों की तुलना में बेहतर है। कामकाजी महिलाएं अपने घरेलू दायित्वों के साथ-साथ कार्यस्थल के कार्यों को बखूबी पूरा कर रही हैं। बेहतर उत्पादकता के चलते शिक्षा और बैंकिंग जैसे क्षेत्रों में महिलाओं को तरजीह दी जा रही है।
आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर महिलाएं आज ज्यादा खुशहाल है। परिवार की जिम्मेदारी के साथ आय अर्जित करना मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन नहीं है। जीवन में आर्थिक समृद्धि के लिए सिर्फ कमाना या बचाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे सही जगह पर निवेश करना भी जरूरी है। भले ही यह रकम कितनी भी छोटी क्यों न हो। जैसे-जैसे आमदनी बढ़ती जाए निवेश की राशि में इजाफा करते जाएं।
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घर और दफ्तर के बीच संतुलन
भारतीय महिलाएं आज घर से लेकर युद्ध के मैदान तक अपनी कामयाबी के झंडे बुलंद कर रही हैं। कई क्षेत्रों में इनका प्रदर्शन पुरुषों की तुलना में बेहतर है। कामकाजी महिलाएं अपने घरेलू दायित्वों के साथ-साथ कार्यस्थल के कार्यों को बखूबी पूरा कर रही हैं। बेहतर उत्पादकता के चलते शिक्षा और बैंकिंग जैसे क्षेत्रों में महिलाओं को तरजीह दी जा रही है।
आर्थिक फैसलों में पीछे महिलाएं
इतनी मेहनत कौशल के बावजूद अधिकांश महिलाएं अपनी आर्थिक सुरक्षा के बारे में नहीं सोचतीं। पिछले दिनों आई एक शोध रपट में बताया गया है कि कामकाजी महिलाओं में 80 फीसद से ज्यादा महिलाएं निवेश से जुड़े फैसले खुद नहीं लेती हैं। अपने पैसे के निवेश के लिए वे परिवार के सदस्यों और मित्रों पर ही निर्भर रहती हैं। इस वजह से इनके वित्तीय लक्ष्य पूरे होने में कई तरह ही अड़चनें आती हैं।
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बजट निर्माण में महिलाओं की महारथ
ऐसा नहीं है कि महिलाओं को वित्तीय मामलों की समझ नहीं है. यह बात मजबूती के साथ पुष्ट हो चुकी है कि घर का बजट बनाने में महिलाएं पारंगत होती हैं। जिस सूझबूझ के साथ वह कम पैसे में पूरे महीने का खर्च चला लेती हैं इस काम को पुरुष नहीं कर पाते हैं। आमतौर पर घर का बजट महिलाएं ही बनाती हैं। फाइनेंशियल प्लानिंग की यही पहली कड़ी है। खर्च को व्यवस्थित करने के बाद जो पैसा बचे उसे सही जगह निवेश करना चाहिए, लेकिन निवेश के मामले में वह आत्मनिर्भर क्यों नहीं बन पा रही हैं, इस पर गौर करने की जरूरत है।