कॉरपोरेट क्षेत्र में अहम पदों पर महिलाओं की भागीदारी लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। निजी हो या सरकारी कंपनी- यहां के निदेशकों में महिलाएं 29 फीसदी हैं। इनमें सरकारी कंपनियों में यह आंकड़ा 21% और निजी कंपनियों में 30 % है। यही नहीं एक व्यक्ति वाली कंपनियों में भी महिलाओं की हिस्सेदारी 28 % है। इससे स्पष्ट है कि महिला प्रतिनिधित्व के मामले में निजी कंपनियां आगे हैं। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की नवीनतम रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।
कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत कुछ श्रेणियों की कंपनियों के बोर्ड में एक महिला निदेशक का होना अनिवार्य किया गया है, जिसने महिलाओं की उपस्थिति सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई है। इसके अलावा, उच्च शिक्षा और पेशेवर अनुभव ने भी नेतृत्व के लिए महिलाओं का दायरा बढ़ाया है। हालांकि, सामाजिक स्तर पर कई बाधाएं बनी हुई हैं।
पुरुषों से बेहतर
सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय महिलाएं पुरुषों की तुलना में घरेलू काम और देखभाल संबंधी गतिविधियों पर काफी ज्यादा समय देती हैं। इसका सीधा असर उनके कॅरिअर की निरंतरता और वरिष्ठ पदों तक पहुंचने की संभावना पर पड़ सकता है।
ये भी पढ़ें:
एक्सप्लेनर: दुनियाभर में मोबाइल फोन 15 फीसदी महंगे हुए, आखिर क्यों बढ़ते जा रहे दाम?
राह की चुनौती
बोर्ड स्तर पर बदलाव के बावजूद वरिष्ठ प्रबंधन, सीईओ और शीर्ष पदों पर महिलाओं की पहुंच अभी सीमित है। घरेलू जिम्मेदारियां, कार्यस्थल का सुरक्षित माहौल, मातृत्व के बाद वापसी और पुरुष-प्रधान पेशेवर नेटवर्क जैसी सामाजिक बाधाएं अब भी उनके कॅरिअर की राह में बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
सेवा क्षेत्र की 71 फीसदी कंपनियां पंजीकृत
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 62,986 कंपनियां पंजीकृत हुईं जबकि 8,233 कंपनियां बंद हुईं। पिछली चार तिमाहियों में क्रमशः पंजीकृत कंपनियों की संख्या 69,772, 56,008, 60,836 और 61,139 रही। इसी अवधि में बंद कंपनियों की संख्या क्रमशः 4,347, 3,627, 4,980 और 9,138 रही। नए पंजीकरण में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 72%, उद्योग की 25% और कृषि की 3% रही। इसमें बिजनेस सर्विसेज, वित्तीय सेवाएं और रियल एस्टेट प्रमुख हैं। 30 जून तक देश में कुल 31,63,190 पंजीकृत कंपनियां हैं।