विकास के लिए जिस क्षमता और संसाधनों की जरूरत होती है, वे बिहार में भरपूर हैं। राज्य का मानव संसाधन और टैलेंट किसी से कम नहीं है। इसी के दम पर बिहार देश के औद्योगिक नक्शे पर जगह बना सकता है। इसके लिए जरूरत है तो राजनीतिक स्थिरता और स्पष्ट नीति की।
ये उदाहरण बताते हैं कि निवेश के लिए स्पष्ट नीति और स्थिरता अहम है। निवेशकों में यह धारणा बलवती होती गई कि बिहार में नीति का आधार आर्थिक न होकर प्राथमिक रूप से राजनीतिक रहा है।
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अवॉयड लिस्ट से बाहर निकल सकता है राज्य
घरेलू सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों, लॉजिस्टिक और विनिर्माण क्षेत्र को भी राजनीतिक स्थरिता के जरिये स्थायी नीति मिले तो इसका सकारात्मक प्रभाव दिखेगा। टाटा और जेएसडबल्यू जैसे औद्योगिक घरानों ने शुरुआती रुचि दिखाई है। इससे बिहार को ‘अवॉयड’ लिस्ट से बाहर निकाला जा सकता है।
ये संकेत अच्छे हैं...डिस्कॉम कंपनियां लाभ में
बिहार में अच्छा भी हो सकता है। इसका उदाहरण पेश करती हैं राज्य की दोनों डिस्कॉम कंपनियां। नॉर्थ और साउथ बिहार डिस्कॉम ने 2023-24 में घाटे से निकलकर खुद को लाभ कमाने वाली कंपनी के रूप में स्थापित किया। बिजली वितरण हानि में कमी और बिलिंग क्षमता में सुधार ने साबित किया कि ईमानदार प्रशासनिक तरीके बिहार में किसी भी क्षेत्र की तस्वीर बदल सकते हैं।
यह तथ्य निवेशकों के लिए बेहतर संकेत देता है। अब सूबे के राजनीतिक नेतृत्व पर निर्भर है कि वह किस दिशा को चुनता है।