रोजगार के बारे में सूचना देने वाले मंच नौकरी ने मंगलवार को जारी रिपोर्ट में कहा, वित्त वर्ष 2025-26 की नई कर व्यवस्था लागू होने के छह महीने बाद सालाना 12.75 लाख रुपये तक कमाने वाले पेशेवर सोच-विचारकर खर्च की तुलना में बचत, निवेश और कर्ज चुकाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि, नई कर व्यवस्था को लेकर सभी लोग जागरूक नहीं हैं।
आयकर में छूट मिलने के साथ नौकरीपेशा कर्मचारी वित्तीय नियोजन पर अधिक ध्यान देने लगे हैं। नई कर व्यवस्था लागू होने के बाद करीब 57 फीसदी लोग अपनी अतिरिक्त आय को बचत और निवेश में लगा रहे हैं।
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रोजगार के बारे में सूचना देने वाले मंच नौकरी ने मंगलवार को जारी रिपोर्ट में कहा, वित्त वर्ष 2025-26 की नई कर व्यवस्था लागू होने के छह महीने बाद सालाना 12.75 लाख रुपये तक कमाने वाले पेशेवर सोच-विचारकर खर्च की तुलना में बचत, निवेश और कर्ज चुकाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि, नई कर व्यवस्था को लेकर सभी लोग जागरूक नहीं हैं। नए लोग सर्वाधिक जानकारी रखते हैं। 64 फीसदी लोगों ने लाभों के बारे में पूरी जानकारी होने की बात कही है। 43 फीसदी प्रतिभागियों ने स्वीकार किया कि वे या तो स्पष्ट नहीं हैं या बदलावों से पूरी तरह अनजान हैं।
जीवनशैली में सुधार और कर्ज चुकाने पर भी खर्च
रिपोर्ट के मुताबिक, 30 फीसदी लोग अतिरिक्त आय का इस्तेमाल कर्ज चुकाने में कर रहे हैं। वहीं, कुछ फीसदी लोग ही अतिरिक्त धन को उपभोग में लगा रहे हैं। इसमें 9 फीसदी अपनी जीवनशैली में सुधार पर खर्च कर रहे हैं, जबकि सिर्फ चार फीसदी यात्रा और अवकाश पर खर्च कर रहे हैं।
यह रिपोर्ट देशभर में 12.75 लाख रुपये प्रति वर्ष तक कमाने वाले 20,000 से अधिक पेशेवरों पर किए गए सर्वे पर आधारित है। इनमें से एक भी लोगों पर टैक्स देनदारी अब शून्य है।
बचत करने में इन क्षेत्रों के कर्मचारी सबसे आगे
रिपोर्ट में उद्योग-वार स्पष्ट अंतर भी उजागर किया गया है। इसमें उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र के 76 फीसदी पेशेवर अपनी अतिरिक्त आय बचाने में सबसे आगे हैं। इसके बाद वाहन (63 फीसदी) और औषधि (57 फीसदी) क्षेत्र के पेशेवर हैं।
एफएमसीजी कंपनियों और होटल क्षेत्र के कर्मचारी दीर्घकालिक सेवानिवृत्ति योजना एवं निवेश के प्रति सबसे अधिक प्रतिबद्ध हैं।
दिल्ली और गुरुग्राम के पेशेवर सबसे आगे
दिल्ली और गुरुग्राम के पेशेवर बचत के मामले में शीर्ष पर हैं। यहां क्रमशः 63 फीसदी और 64 फीसदी लोग अपनी अतिरिक्त आय अलग रखते हैं। चेन्नई में 44 फीसदी प्रतिभागियों ने ऋण चुकाने पर ध्यान दिया। मुंबई सेवानिवृत्ति से जुड़ी बचत में अग्रणी रहा, जहां 51 फीसदी लोग अतिरिक्त आय को विशेष रूप से सेवानिवृत्ति निधि में लगा रहे हैं।