भारत में गर्मी का मौसम अप्रैल से शुरू होकर के अक्टूबर तक रहता है। इस दौरान अप्रैल के आखिरी दिनों से लेकर के 30 जून तक भीषण गर्मी पड़ती है, जिसमें तापमान कई इलाकों में 50 डिग्री के आस-पास चला जाता है।
हालांकि उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जुलाई-सितंबर के बीच मानसून सीजन में उमस भी काफी पड़ती है, जिससे कूलर भी काम नहीं करते हैं। उस वक्त केवल एसी ही उमस से निजात देता है। इसलिए लोग 16 से 18 डिग्री सेल्सियस पर एसी का तापमान रखते हैं।
जापान में 3 महीने के लिए रहता है एसी का तापमान
जापान में लगातार 13 साल से सरकार कूल ब्रीज कैंपेन चला रही है। इस दौरान सभी सरकारी और प्राइवेट बिल्डिंग में लगे एसी का तापमान 28 डिग्री सेल्सियस पर सेट कर दिया जाता है। यह तापमान केवल तीन महीने (जून-सितंबर) के लिए लागू किया जाता है।
इस दौरान कर्मचारियों को भी कोट-पैंट-टाई पहनकर ऑफिस आने में छूट दी जाती है और वो ढीले-ढाले कपड़े पहनकर भी ऑफिस आ सकते हैं। हालांकि वहां पर अधिकतम तापमान भी 35 डिग्री सेल्सियस तक जाता है।
सरकार ने कंपनियों से अपने ग्राहकों को यह बताने के लिए कहा गया है कि उनके पैसे की बचत और बेहतर स्वास्थ्य के नजरिये से कितना तापमान नियत करना बेहतर है। यह तापतान 24 से 26 डिग्री के दायरे में होगा।
बयान के अनुसार, ‘चार से छह महीने के जागरूकता अभियान के बाद लोगों की राय जानने के लिये सर्वे किया जाएगा। उसके बाद मंत्रालय इसे अनिवार्य करने पर विचार करेगा। अगर सभी ग्राहक इसे अपनाते हैं तो एक साल में ही 20 अरब यूनिट बिजली की बचत होगी।’
2030 तक हो जाएगा यह लोड
बीईई का कहना है कि मौजूदा बाजार स्थिति को देखते हुए एसी के कारण देश में कुल लोड 2030 तक 200,000 मेगावाट हो जाएगी। इसमें आगे और वृद्धि की उम्मीद है क्योंकि अभी देश में केवल 6 प्रतिशत घरों में एसी का उपयोग हो रहा है। एक अनुमान के अनुसार अभी लगे एसी की क्षमता 8 करोड़ टीआर (टन आफ रेफ्रिजरेटर) है जो बढ़कर 2030 तक 25 करोड़ टीआर हो जाएगी।