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वाणिज्य सचिव बोले: देश में गेहूं संकट नहीं, बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने को रोक का फैसला 

Sat, 14 May 2022 10:09 PM IST
अभिषेक दीक्षित बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने कहा गेहूं के निर्यात पर रोक लगाने की बड़ी वजह अनियंत्रित व्यापार से गेहूं की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी है।
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गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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वाणिज्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम ने शनिवार को कहा कि देश में कोई गेहूं आपूर्ति संकट नहीं है। गेहूं निर्यात पर रोक का फैसला घरेलू बाजार में इसकी बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और देश के पड़ोसी तथा गरीब-कमजोर देशों की खाद्य जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि कीमतों में सुधार आने पर सरकार अपने फैसले की समीक्षा कर सकती है। 

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उन्होंने कहा कि रोक का फैसला सही समय में लिया गया है। उन्होंने कहा कि गेहूं के उत्पादन में कोई बड़ी गिरावट नहीं आई है। देश में कोई संकट नहीं है। सरकारी स्टॉक और निजी स्टॉकों में पर्याप्त खाद्य मौजूद है। उन्होंने कहा कि रोक के कदम का मुख्य मकसद महंगाई को रोकना है। हम गेहूं के ट्रेड को एक निश्चित दिशा में बढ़ा रहे हैं। हम नहीं चाहते हैं कि गेहूं का अनियंत्रित तरीके से उन जगहों पर जहां इसकी जमाखोरी हो या फिर जहां इसका हमारी उम्मीद के मुताबिक इस्तेमाल न किया जाए।

उन्होंने कहा कि हमने देश के अंदर पर्याप्त खाद्य स्टॉक उपलब्ध होना सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया है। हर देश के लिए खाद्य बहुत ही संवेदनशील आइटम है क्योंकि यह गरीब, मध्य और अमीर सभी को प्रभावित करता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि देश के कुछ हिस्सों में गेहूं के आटे की कीमतें 40 फीसदी तक बढ़ गई हैं। 
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उन्होंने कहा कि सरकार अपने पड़ोसी और गरीब मुल्कों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर भी प्रतिबद्ध है। इसलिए हमने अपने पड़ोसी के लिए निर्यात का विकल्प खुला रखा है। हमने गरीब देशों के लिए ऐसा ही विकल्प रखा है और यदि वे आग्रह करते हैं तो उन्हें निर्यात करेंगे। 

वहीं, खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने कहा गेहूं के निर्यात पर रोक लगाने की बड़ी वजह अनियंत्रित व्यापार से गेहूं की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी है। उन्होंने कहा कि खाद्य उपलब्धता और कीमतों में स्थिरता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। इसलिए गेहूं निर्यात पर रोक इन कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश है। निर्यात पर रोक लगाने का सरकार का कदम विशेषज्ञों के लिए आश्चर्य की बात है, क्योंकि एक दिन पहले ही सरकार ने साफ किया था कि देश गेहूं के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए 9 देशों में प्रतिनिधिमंडल भी भेजे जाने की जानकारी भी दी। इसमें मोरक्को, इंडोनेशिया, थाईलैंड, फिलीपींस, वियतनाम, तुर्की, अलजीरिया, लेबनान भेजा जाना था।
                                                                      
इस मौके पर खाद्य सचिव ने कहा भारत द्वारा गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की एक वजह यह भी है कि दुनिया के 7 देशों ने उत्पादन में कमी को देखकर विभिन्न तरह के प्रतिबंध आयद कर दिये हैं।  इस वर्ष के लिए भारत ने एक करोड़ टन गेहूं निर्यात का लक्ष्य रखा है। 2022 से वैश्विक स्तर पर अनाज की बढ़ती मांग के बीच वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 12 मई को इस संदर्भ में एक प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की थी।

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