दुनिया भर के निवेशकों ने हफ्ते की शुरुआत एक कठिन कारोबारी सत्र के साथ की। भारत समेत पूरी दुनिया के शेयर बाजार में सोमवार के कारोबारी सत्र के दौरान बिकवाली की होड़ दिखी। भारत का प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 2,222.55 (-2.74%) अंकों की गिरावट के साथ 78,759.40 के स्तर पर बंद हुआ। दूसरी ओर, निफ्टी 2.68% की गिरावट के साथ 24,055.60 पर बंद हुआ।
वैश्विक स्तर पर शेयर बाजार में अचानक बिकवाली का क्या कारण है? जापानी मुद्रा येन का इस गिरावट से क्या संबंध है? येन कैरी ट्रेड क्या है? भारतीय बाजार पर इस बिकवाली का क्या असर पड़ेगा? आइए इसे समझने की कोशिश करें?
सोमवार को वैश्विक शेयर बाजार में क्या हुआ?
सोमवार को जब एशियाई बाजार खुले जापान के इक्विटी बाजार में भारी बिकवाली नजर आई इसके असर से पूरी दुनिया के बाजार में लाली छा गई। जापान का बेंचमार्क निक्केई 12.40% गिर गया, यह अक्टूबर 1987 में 'ब्लैक मंडे' के बाद से इसकी सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट रही। व्यापक बाजार टॉपिक्स इंडेक्स भी 12.48% टूट गया। बिकवाली की तीव्रता ऐसी थी कि दोनों ही इंडेक्स पर वायदा का कारोबार रोकना पड़ा। दक्षिण कोरिया के कोस्पी, कोस्डैक कैश और वायदा बाजार में भी व्यापार निलंबित कर दिया गया। यूरोपीय बाजार भी बिकवाली के दबाव में टूट गए। भारत में सेंसेक्स 2,200 अंक से अधिक लुढ़क गया, जिससे निवेशकों करीब 15.34 लाख करोड़ रुपये का चूना लग गया।
जापान की मुद्रा का गिरावट से क्या संबंध है?
बाजार के जानकार इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण 'येन कैरी ट्रेड' में बिकवाली को मान रहे हैं। येन कैरी ट्रेड क्या है यह जानने से पहले जानते हैं कैरी ट्रेड क्या है? कैरी ट्रेड एक व्यापक रूप से लोकप्रिय ट्रेडिंग रणनीति है जिसमें एक निवेशक कम ब्याज दरों और कमजोर मुद्रा वाले देश से उधार लेता है और ऊंची दरों वाले देश की संपत्ति में पैसा निवेश करता है। येन (जापानी मुद्रा) इस काम के लिए सबसे मुफीद मुद्रा मानी जाती है क्योंकि जापान ने पिछले दो दशकों से शून्य ब्याज दर की पॉलिसी अपना रखी थी। जापान से धन का प्रवाह दुनिया भर के इक्विटी बाजारों के लिए तरलता का एक प्रमुख स्रोत रहा है। इसका मतलब है कि दुनियाभर के बाजारों के नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में जापान से आई नकदी (येन) का खासा योगदान रहता है।
अब ऐसा क्या हो गया जिससे पिटने लगे बाजार?
पिछले हफ्ते बैंक ऑफ जापान ने इस साल दूसरी बार ब्याज दरों को बढ़ाकर 0.25% कर दिया। इसके साथ ही जापान ने अपने बॉन्ड्स में बदलाव की भी योजना लाने घोषणा की है। इन दोनों फैसलों के अलावा बीओजे ने आगे भी ब्याज दरों को बढ़ाने का रास्ता खुला छोड़ दिया है। इसका परिणाम हुआ कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले येन काफी मजबूत हुआ। मजबूत होती घरेलू मुद्रा और आगे भी ब्याज दर बढ़ने की आशंका से जापान में निवेशकों को येन कैरी ट्रेड करना घाटे का सौदा लगने लगा। जिसके कारण सोमवार को जपान के शेयर बाजार में बड़ी बिकवाली नजर आई। इससे बने नकारात्मक माहौल ने पूरी दुनिया के बाजार को अपनी चपेट में ले लिया।
क्या बाजार में मंदी का और कोई कारण रहा?
सोमवार को वैश्विक बाजार में बिकवाली का एक और कारण अमेरिका में मंदी का डर बढ़ना भी रहा। अमेरिका में बेरोजगारी दर 4.3% तक बढ़ गई है, जिसके बाद अब डर है कि अगले महीने फेड दरों में कटौती कर सकता है। ट्रेजरी बॉन्ड में सुरक्षित निवेश की मांग देखी जा रही है। यूएस10-वर्ष की बॉन्ड यील्ड 3.723% है, जो 2023 के मध्य से सबसे कम है। ईरान और उसके प्रॉक्सी के खिलाफ इस्राइल युद्ध में उलझने की आशंकाओं से भू-राजनीतिक तनाव भी बढ़ गया है। इस स्थिति में अमेरिका की किसी भी प्रत्यक्ष भागीदारी पर भी उत्सुकता से नजर रखी जा रही है।
भारत के लिए इस गिरावट का क्या मतलब है?
येन कैरी ट्रेड में लंबे समय तक बिकवाली से दलाल स्ट्रीट में भी उतार-चढ़ाव की स्थिति दिख सकती है। जापान भारत में शीर्ष 10 इक्विटी बाजार निवेशकों में से एक है। भारत की नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड के आंकड़ों के अनुसार जून के अंत में जापानी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के पास 2.05 लाख करोड़ रुपये के भारतीय शेयर थे। ऐसे में उनकी ओर से की गई बिकवाली से घरेलू इंडेक्स कमजोर होंगे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों की बढ़ती ताकत ऐसी स्थिति में शेयर बाजारों के लिए एक सहारा सुनिश्चित करेगी। वहीं, वैश्विक स्तर पर निवेशकों के बीच जोखिम से दूर रहने की धारणा बाजार की लिक्विडिटी के लिहाज से भी हानिकारक हो सकती है। इससे रुपये पर भी दबाव पड़ सकता है। रुपया पिछले पिछले महीने एशिया में दूसरा सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा रही है। सोमवार को भी रुपया डॉलर के मुकाबले 6 पैसे की गिरावट के साथ अपने सर्वकालिक निचले स्तर 82.88 रुपये के पर बंद हुआ।