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क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955? आपको कैसे होगा फायदा, इधर जानें सबकुछ

Wed, 08 Apr 2020 01:23 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : PTI
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कोरोना वायरस जैसी गंभीर वैश्विक महामारी से हर कोई परिचित है। सरकार ने इसको फैलने से रोकने के लिए भारत में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन किया है। इसके अतिरिक्त भी कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने राज्यों को पत्र लिखकर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 लागू करने यानी राज्यों से जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा है। 

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क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955? 

  • आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 को भारत की संसद द्वारा 1955 में पारित किया गया था।
  • सरकार की देख-रेख में इस कानून के तहत 'आवश्यक वस्तुओं' की बिक्री, उत्पादन, आपूर्ति आदि को आम जनता के हित के लिए नियंत्रित किया जाता है।
  • इस कानून के तहत ये ध्यान दिया जाता हे कि उपभोक्ताओं को सही कीमत पर चीजें मिल रही हैं या नहीं।
  • इस कानून के तहत केंद्र सरकार के पास अधिकार होता है कि वह राज्यों को स्टॉक लिमिट तय करने और जमाखोरों पर नकेल कसने के लिए कहे ताकि चीजों की आपूर्ति प्रभावित न हो और दाम भी ज्यादा ना बढ़े। 
  • जब कोई वस्तु सरकार द्वारा 'आवश्यक वस्तु' घोषित की जाती है, तो सरकार के पास एक अधिकार आ जाता है। उसके मुताबिक वे पैकेज्ड वस्तुओं का अधिकतम खुदरा मूल्य तय कर सकती है।
  • लेकिन अगर कोई दुकानदार उस मूल्य से अधिक दाम पर चीजों को बेचता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होती है।

आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 को बनाने का कारण?
कुछ वस्तुएं ऐसी होती हैं जिसके बिना जीवन व्यतीत करना मुश्किल होता है। ऐसी चीजों को सरकार आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत आवश्यक वस्तु की सूची में डाल देती है। सरकार का मकसद है कि लोगों को जरूरी चीजें सही कीमत पर मिले।

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कौन सी चीजें आवश्यक वस्तु की श्रेणी में शामिल
आवश्यक वस्तुओं में पेट्रोलियम (पेट्रोल, डीजल, नेफ्था और सोल्वेंट्स आदि), खाना (बीज, वनस्पति, दाल, गन्ना, गुड़, चीनी, चावल और गेहूं आदि), टेक्सटाइल्स, जरूरी ड्रग्स, फर्टिलाइजर्स शामिल है। सरकार द्वारा इस सूची में समय-समय पर बदलाव होता रहता है। हाल ही में सरकार ने मास्क और सैनिटाइजर को भी सूची में शामिल किया था।

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