मुश्किलों से जूझ रही वोडाफोन आइडिया ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार की मदद के बिना वह समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) का पूरा बकाया चुकाने में असमर्थ है। दूरसंचार कंपनी ने अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए सरकार से किस्तों में भुगतान, लेवीज में कटौती और संकट में फंसे क्षेत्र के लिए फ्लोर प्राइस लागू करने की भी मांग की है।
वोडाफोन आइडिया ने इस संबंध में दूरसंचार विभाग और दूरसंचार मंत्रालय को पत्र भेजा है। कंपनी का यह कदम इसलिए भी अहम है, क्योंकि उसे दूरसंचार विभाग को 53 हजार करोड़ रुपये का बकाया चुकाना है और इसमें से वह अभी तक महज सात फीसदी का ही भुगतान कर सकी है।
वोडाफोन आइडिया ने कहा, उसकी वित्तीय स्थिति अच्छी नहीं है। कंपनी उसी स्थिति में अपनी देनदारियां चुका पाएगी, यदि उसे ब्याज, जुर्माने सहित बाकी का भुगतान किस्तों में करने की अनुमति दी जाए। कंपनी ने सरकार से जीएसटी क्रेडिट के समायोजन की भी मांग की, जिससे एजीआर का भुगतान करने में मदद मिल सकती है।
पिछले कुछ साल में हुए घाटे का हवाला देते हुए कंपनी ने कहा कि दूरसंचार क्षेत्र का वित्तीय संकट किसे से छिपा हुआ नहीं है। कंपनी ने अपने मौजूदा 30 करोड़ ग्राहकों और 10 हजार कर्मचारियों का उल्लेख करते हुए ‘सरकार की तरफ से तुरंत सहयोग’ की भी गुहार लगाई। वोडाफोन आइडिया ने कहा कि वह अपने आकलन वाले मूल धन का निबटारा कर सकती है, यदि केंद्र द्वारा उसे जीएसटी क्रेडिट के मद में सरकार के पास पड़े 8,000 करोड़ रुपये को इसमें शामिल करने की अनुमति दी जाए।
एजीआर की शर्तों को लचीला बनाए सरकार : सीओएआई
उद्योग संगठन सीओएआई ने बड़े संकट की आशंकाएं जाहिर करते हुए सरकार से दूरसंचार के एजीआर बकाये के नियमों को लचीला बनाए जाने की मांग की है। इन मांगों में एजीआर देनदारियों को कवर करने के लिए सस्ते कर्ज के विस्तार सहित कई मांग की हैं।
सीओएआई के महानिदेशक राजन मैथ्यूज ने दूरसंचार सचिव अंशू प्रकाश को भेजे पत्र में कहा, दूरसंचार क्षेत्र के मामले में बैंक किसी तरह का जोखिम लेने के लिए तैयार नहीं है और लगातार दूरसंचार कंपनियों से अपने कर्ज में कमी करने के लिए कह रहे हैं। साथ ही बैंक नई बैंक गारंटी जारी करने या बैंक गारंटियों के नवीकरण से भी इनकार कर रहे हैं।