दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार होने के बावजूद वेनेजुएला वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला में आज भी एक सीमित भूमिका निभाता है। ऊर्जा नीति विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा का कहना है कि मौजूदा हालात में वेनेजुएला के घटनाक्रम से अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर तुरंत कोई बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में नरेंद्र तनेजा ने बताया कि वेनेजुएला के पास विशाल तेल भंडार जरूर हैं, लेकिन वह वैश्विक बाजार में बहुत छोटा सप्लायर है।
उन्होंने कहा कि वेनेजुएला रोजाना केवल करीब 9 लाख बैरल तेल का उत्पादन करता है, जिसमें से अधिकांश तेल चीन को निर्यात किया जाता है। इसके अलावा, वेनेजुएला का तेल बेहद भारी (हेवी क्रूड) होता है, जिसे दुनिया की अधिकांश रिफाइनरियां आसानी से प्रोसेस नहीं कर पातीं। तनेजा ने यह भी कहा कि अमेरिकी दखल के बाद आने वाले समय में वेनेजुएला का उत्पादन तेजी से बढ़ सकता है। उनके मुताबिक, अगले एक साल में वेनेजुएला का तेल उत्पादन 30 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकता है, जिससे वैश्विक सप्लाई सिस्टम में अतिरिक्त तेल शामिल होगा। यह स्थिति बाजार के लिए नकारात्मक नहीं, बल्कि स्थिरता लाने वाली हो सकती है।
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उन्होंने भारतीय तेल कंपनियों के लिए भी इसे एक बड़ा अवसर बताया। तनेजा के अनुसार, अगर वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंध हटते हैं तो भारतीय कंपनियां फिर से वहां तेल आयात और निवेश शुरू कर सकती हैं। भारत लंबे समय से वेनेजुएला के साथ ऊर्जा क्षेत्र में काम करता रहा है और भारतीय रिफाइनरियां वहां के तेल को लेकर अनुभव भी रखती हैं।
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका ने वेनेजुएला में बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की और अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो तथा उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में लेकर देश से बाहर भेज दिया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि मादुरो दंपती पर ड्रग तस्करी और नार्को-आतंकवाद से जुड़े गंभीर आरोप हैं और उनका मुकदमा न्यूयॉर्क में चलेगा।