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ट्रैवल इंश्योरेंस: अब मजबूरी नहीं जरूरी, लागत 1% से कम; लेकिन यात्रा की सुरक्षा और मन की शांति 100% सुनिश्चित

Mon, 05 Jan 2026 07:56 AM IST
शुभम कुमार मीत कपाड़िया, हेड, ट्रैवल इंश्योरेंस, पॉलिसीबाजार डॉट कॉम

सार

ट्रैवल इंश्योरेंस अब महंगी या जरूरी विकल्प नहीं रही। अब प्रीमियम पूरी ट्रिप की लागत का सिर्फ 1% या उससे भी कम होता है, लेकिन यह आपकी यात्रा को कई अनिश्चितताओं से सुरक्षित बनाता है। बीमा लेने से किसी भी आपात स्थिति, जैसे मेडिकल इमरजेंसी, उड़ान रद्द या सामान खोने की घटनाओं में आर्थिक सुरक्षा मिलती है। 

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ट्रैवल इंश्योरेंस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राहुल हाल ही में छुट्टियां मनाने पेरिस गए थे। सब कुछ परफेक्ट था। लेकिन अचानक राहुल के पेट में तेज दर्द उठा। पास के अस्पताल में जाने पर पता चला कि अपेंडिक्स का अटैक पड़ा है और तुरंत सर्जरी करनी होगी। सर्जरी होने के बाद जैसे ही अस्पताल का बिल हाथ में आया, राहुल के पैरों तले जमीन खिसक गई। बिल था 25,000 डॉलर। जिस ट्रिप का कुल बजट था पांच लाख रुपये, वहां सिर्फ एक रात के अस्पताल खर्च ने जिंदगी भर की जमा-पूंजी हजम कर ली। यह कोई डरावनी कहानी नहीं है, बल्कि उन हजारों भारतीय मुसाफिरों की हकीकत है, जो ट्रैवल इंश्योरेंस को केवल वीजा की रस्म समझते हैं।

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रिस्क अब ऑप्शनल नहीं है
विदेश में मेडिकल इमरजेंसी आपकी सबसे बड़ी वित्तीय दुश्मन है। पॉलिसीबाजार के आंकड़े बताते हैं कि अब लोग सिर्फ 1,000-2,000 रुपये बचाने के लिए अपनी पूरी ट्रिप दांव पर नहीं लगाना चाहते। यही कारण है कि पिछले साल ट्रैवल इंश्योरेंस की मांग में 15% की बढ़ोतरी देखी गई। जीएसटी में कटौती के बाद से ट्रैवल इंश्योरेंस 18 से 20% सस्ता भी हुआ है।

क्यों जरूरी है ट्रैवल इंश्योरेंस?

  •  मेडिकल बिल का बोझ: अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में इलाज का खर्च भारत से 10 से 20 गुना ज्यादा है। वहां 500,000 डॉलर का कवर अब लग्जरी नहीं, बल्कि न्यू नॉर्मल बन गया है।
  •  अनिवार्य नियम: जर्मनी और फ्रांस जैसे 35 से ज्यादा देशों में बिना बीमा के प्रवेश मुमकिन नहीं। शेंगेन देशों में तो कम से कम 30,000 यूरो का कवर होना जरूरी होता है।
  • छिपे हुए खतरे: ट्रैवल इंश्योरेंस सिर्फ अस्पताल के लिए नहीं होता। अगर आपका पासपोर्ट खो जाए, कनेक्टिंग फ्लाइट छूट जाए, या बैग चोरी हो जाए, तो परदेस में ये बीमा ही आपका सबसे बड़ा दोस्त साबित होता है।

 

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ट्रैवल इंश्योरेंस के सात फायदे

  • ज्यादातर लोग इसे सिर्फ अस्पताल के बिल तक सीमित समझते हैं, लेकिन इसमें सात ऐसे फीचर्स हैं, जो आपकी ट्रिप को खराब होने से बचा सकते हैं:
  • एडवेंचर स्पोर्ट्स: पैराग्लाइडिंग या स्कूबा डाइविंग के दौरान चोट लगने पर कवर।
  • कनेक्टिंग फ्लाइट: पहली फ्लाइट की देरी से दूसरी फ्लाइट छूटने पर नई टिकट और होटल का खर्च।
  • पासपोर्ट गुम होना: नया या डुप्लीकेट पासपोर्ट बनवाने की फीस और दूतावास तक जाने का खर्च।
  • कंपनसेट विजिट: विदेश में अस्पताल में भर्ती होने पर परिवार के सदस्य को पास बुलाने का हवाई किराया।
  • सामान में देरी: चेक-इन बैग देर से मिलने पर जरूरी कपड़े और सामान खरीदने के लिए मिलने वाला मुआवजा।
  • घर की इमरजेंसी: विदेश यात्रा के दौरान भारत में घर पर चोरी या आग लगने पर तुरंत वापसी का टिकट।
  • ऑटोमैटिक एक्सटेंशन: मेडिकल इमरजेंसी में अगर रुकना पड़े, तो पॉलिसी अपने आप बढ़ जाती है।

 

बीमा कंपनी 7 दिन (एशिया) 14 दिन (शेंगेन) 21 दिन (US/कनाडा को छोड़कर) 28 दिन (US/कनाडा सहित)
Tata 808 910 1,023 2,269
ICICI Lombard 746 1,108 1,437 2,797
Reliance 589 773 988 1,747
Bajaj 621 900 1,178 3,196
Care 417 963 1,101 2,240
Niva 323 677 984 2,015


ट्रैवल इंश्योरेंस लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

  • यूरोप (Schengen): कम से कम 1,00,000 डॉलर का केवर लें (न्यूनतम नियम 30,000 डॉलर का है, लेकिन चिकित्सा खर्च को देखते हुए एक लाख डॉलर सुरक्षित है)
  • USA/कनाडा: 5,00,000 डॉलर से कम का कवर जोखिम भरा हो सकता है।
  • एशिया/दुबई: 50,000 डॉलर का कवर पर्याप्त है।
  • कैशलेस सुविधाः क्या आपकी बीमा कंपनी का उस देश के अस्पतालों के साथ सीधा टाइ-अप है? (ताकि जेब से भुगतान न करना पड़े)।
  • 'नो सब-लिमिट : रूम किराया या डॉक्टर की फीस पर कोई कैपिंग है? (नो सब-लिमिट प्लान चुनें)
  • मेडिकल इवैक्यूएशनः गंभीर स्थिति में भारत वापसी का हवाई खर्च शामिल है?
  • पासपोर्ट और बैगेजः क्या पासपोर्ट खोने पर नया बनवाने की फीस कवर है?
  • फ्लाइट डिले: अगर फ्लाइट 6-12 घंटे से ज्यादा लेट होती है, तो क्या भोजन और रुकने का खर्च मिलेगा?
  • ट्रिप कैंसिलेशनः क्या वीजा रिजेक्ट होने या घर में किसी इमरजेंसी के कारण यात्रा रद्द होने पर टिकट के पैसे वापस मिलेंगे?
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